एसएन अग्रवाल आयोग की जांच रिपोर्ट स्वीकार करे भाजपा सरकार: अभय सिंह चौटाला

एसएन अग्रवाल आयोग की जांच रिपोर्ट स्वीकार करे भाजपा सरकार: अभय सिंह चौटाला

इनेलो पार्टी ने किसानों के समर्थन में भाजपा गठबंधन सरकार से यह मांग रखी थी कि बसताड़ा टोल पर किए गए बर्बर लाठीचार्ज की जांच आयोग द्वारा न्यायिक जांच की जाए

 जिस तरह की असंवैधानिक भाषा और किसानों के सिर तोड़ने जैसे आदेश देकर कानून का मजाक तत्कालीन आईएएस अधिकारी द्वारा बनाया गया उसकी जांच होना बेहद जरूरी थी

 जांच आयोग अधिनियम 1952 के नियमों के अनुसार सरकार द्वारा गठित किए गए आयोग की रिपोर्ट स्वीकार करना अनिवार्य है
File Pic - Abhay Singh Chautala

चंडीगढ़, 18 जनवरी: इनेलो प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने बसताड़ा टोल प्लाजा हिंसा मामले की जांच कर रहे न्यायमूर्ति एसएन अग्रवाल (सेवानिवृत्त) के अखबार में छपे बयान जिसमे न्यायमूर्ति ने कहा है कि उनकी रिपोर्ट तैयार है, लेकिन सरकार ने इसे नहीं लिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सरकार को तैयार जांच रिपोर्ट को स्वीकार करना चाहिए। इनेलो पार्टी ने किसानों के समर्थन में भाजपा गठबंधन सरकार से यह मांग रखी थी कि बसताड़ा टोल पर किए गए बर्बर लाठीचार्ज की जांच आयोग द्वारा न्यायिक जांच की जाए। जिसके बाद भाजपा सरकार द्वारा न्यायमूर्ति एसएन अग्रवाल (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में आयोग का गठन 25 सितंबर, 2021 को यह पता लगाने के लिए किया गया था कि 28 अगस्त को बसताड़ा टोल प्लाजा पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज क्यों हुआ था।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज की घटना पर भले ही किसानों और सरकार में समझौता हो गया है लेकिन जिस तरह की असंवैधानिक भाषा और कानून का मजाक तत्कालीन आईएएस अधिकारी, जो उस समय एसडीएम के पद पर तैनात थे, द्वारा बनाया गया उसकी जांच होना बेहद जरूरी थी। इतना ही नहीं भाजपा सरकार ने उक्त आईएएस को बचाते हुए इस दौरान प्रमोशन देकर एडीसी जैसे अति महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर दिया। जांच आयोग अधिनियम 1952 के नियमों के अनुसार सरकार द्वारा गठित किए गए आयोग की रिपोर्ट स्वीकार करना अनिवार्य है। भाजपा सरकार को जांच आयोग की रिपोर्ट स्वीकार करनी चाहिए और आने वाले विधानसभा सत्र में सदन पटल पर भी रखी जाए। जांच रिपोर्ट में अगर कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर दोषी को सजा दिलवानी चाहिए। गौरतलब है कि आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा ने कथित तौर पर पुलिस को किसानों के सिर तोड़ने का निर्देश दिया था जिसका एक वीडियो टेप सोशल मीडिया में वायरल हो गया था। टेप में सिन्हा यह कहते हुए पकड़े गए थे कि अगर प्रदर्शनकारी किसान करनाल में भाजपा के कार्यक्रम तक पहुंचने के लिए बैरिकेड्स तोड़ते हैं तो प्रदर्शन कर रहे किसानों के सिर तोड़ दो।

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