जनसंदेश न्यूज नेटवर्क :— स्वास्थ्य

  पपीता ही नहीं, उसके पत्ते भी सेहत के लिए हैं लाभकारी

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जो व्यक्ति कैंसर पीडि़त हैं उन्हें पपीते के पत्ते का सेवन अवश्य करना चाहिए। पपीते के पत्ते में एंटीबैक्टीरियल तत्व व एसीटोजेन नामक तत्व पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने व उन्हें मारने में अहम भूमिका निभाता है। पपीता एक ऐसा फल है जिसे हेल्थ के लिए काफी लाभदायी माना गया है। इसलिए तो जब भी कोई व्यक्ति बीमार होता है तो उसे पपीता खाने की सलाह दी जाती है। आप भी पपीते का सेवन करते ही होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि पपीता ही नहीं उसके पत्ते भी सेहत के लिए वरदान समान हैं। तो चलिए जानते हैं पपीते के पत्ते से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में-

पोषक तत्वों से पैक: पपीते की तरह ही उसके पत्तों में भी पोषक तत्वों की भरमार होती है। पपीते के पत्ते में विटामिन ए, बी, सी, डी और ई के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स, फलेवोनोइड्स, कैरोटीन होते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें थ्रेओनाइन, ग्लूटामेट एसिड, ग्लाइसीन, वेलिन, ल्यूसीन, लाइसिन, हिस्टीडाइन, एलानिन, प्रोलाइन जैसे 50 से अधिक अमीनो एसिड व पाचन एंजाइम्स पाए जाते हैं। यह पाचन एंजाइम्स शरीर में प्रोटीन, कार्बोहाइडेट व वसा को पचाने में मदद करते हैं। 

लड़े कैंसर से: जो व्यक्ति कैंसर पीडि़त हैं उन्हें पपीते के पत्ते का सेवन अवश्य करना चाहिए। पपीते के पत्ते में एंटीबैक्टीरियल तत्व व एसीटोजेन नामक तत्व पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने व उन्हें मारने में अहम भूमिका निभाता है। खासतौर से गर्भाशय ग्रीवा, प्रोस्टेट, यकृत, स्तन व फेफड़ों के कैंसर में यह बहुत कारगर साबित हुआ है।

मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र: शायद आपको पता न हो लेकिन पपीते के पत्ते का सेवन करने से प्रतिरक्षा तंत्र काफी मजबूत होता है। दरअसल, पपीते के पत्तों में कई तरह के शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो इम्युन सिस्टम को स्टांग बनाते हैं। अगर इसके रस का सेवन किया जाए तो खून में व्हाइट ब्लड सेल्स की मात्रा बढ़ जाती है।

बेअसर करे डेंगू : डेंगू ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति के प्लेटलेट्स गिरने लगते हैं। इतना ही नहीं, कई बार तो इस बीमारी के चलते व्यक्ति की जान तक चली जाती है। यहां गौर करने वाली बात है कि डेंगू से लडऩे के लिए अभी तक कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। लेकिन जो लोग पपीते के पत्ते का सेवन इस बीमारी में करते हैं उससे उन्हें विशेष फायदा होता है क्योंकि पपीते के पत्ते के सेवन से शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बढऩे लगती है। कई अध्ययनों में यह बात साबित भी हो चुकी है।

लिवर की देखभाल: पपीते की तरह की उसके पत्ते भी लिवर को क्लीन करने का काम करते हैं। इसलिए अगर इसका या इसके रस का सेवन किया जाए तो इससे लिवर की सफाई तो होती ही है साथ ही कई तरह की लिवर की बीमारियों जैसे जॉन्डिस व लिवर सिरोसिस से भी बचाव होता है।


सेहत का भरपूर खजाना है ब्राउन राइस, जानिए बेहतरीन लाभ

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व्हाइट राइस में सिंपल काब्र्स पाए जाते हैं जो बेहद जल्दी पच जाते हैं और व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है। लेकिन अगर आप चावलों का एक हेल्दी वर्जन खाना चाहते हैं तो व्हाइट राइस को ब्राउन राइस से रिप्लेस कर दीजिए।

खाने में अगर चावल न मिले तो लगता है कि जैसे भोजन की थाली पूरी न हुई हो। कुछ लोग तो थोड़ी मात्रा में ही सही लेकिन प्रतिदिन चावल अवश्य खाते हैं। आमतौर पर घरों में व्हाइट राइस का सेवन किया जाता है। व्हाइट राइस में सिंपल काब्र्स पाए जाते हैं जो बेहद जल्दी पच जाते हैं और व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है। लेकिन अगर आप चावलों का एक हेल्दी वर्जन खाना चाहते हैं तो व्हाइट राइस को ब्राउन राइस से रिप्लेस कर दीजिए। ब्राउन राइस खाने के कई लाभ होते हैंए तो चलिए जानते हैं ब्राउन राइस से होने वाले लाभ के बारे में-

पोषक तत्व रहें बरकरार

ब्राउन राइस खाने का एक सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि चावल के पोषक तत्व जैसे मिनरल, फाइबर व बी कॉम्पलैक्स यूं ही बरकरार रहते हैं। जबकि व्हाइट राइस में पॉलिशिंग की जाती है जिससे उसके पोषक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं। इसलिए व्हाइट राइस की अपेक्षा ब्राउन राइस खाना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभकारी होता है।

कैंसर से बचाव

आपको शायद पता न हो लेकिन ब्राउन राइस खाने से कैंसर से काफी हद तक बचाव हो सकता है। दरअसल, इसमें पाया जाने वाला फाइबर व अन्य कुछ तत्व कैंसर से लडऩे व उससे बचाव में अहम भूमिका निभाते हैं। 


मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त

भारत की आबादी की एक बड़ी संख्या मधुमेह ग्रस्त है। ऐसे लोगों के लिए सफेद चावलों का सेवन उपयुक्त नहीं माना जाता। लेकिन ऐसे व्यक्ति ब्राउन राइस का सेवन बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं। चूंकि इसमें फाइबर की उच्च मात्रा होती है इसलिए जब इसका सेवन किया जाता है तो इसे पचने में काफी समय लगता है। जिसके कारण रक्त में ग्लूकोज की मात्रा जल्दी से नहीं बढ़ती और मधुमेह नियंत्रित रहता है। भले ही ब्राउन राइस को पकने में समय लगता हो लेकिन बेहतर स्वास्थ्य के लिए कुछ अधिक देर तक इंतजार तो किया ही जा सकता है।

कम करे कोलेस्ट्रॉल

ब्राउन राइस में पाया जाने वाला फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह पाचन तंत्र के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। इसके अतिरिक्त यह रक्त के थक्के बनने से भी रोकता है।

मोटापे से बचाव

जो व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त हैं उनके लिए ब्राउन राइस विशेष रूप से लाभदायी है। दरअसल, इसमें मैग्नीज पाया जाता है जो शरीर की वसा को संश्लेषित करने में मदद करता है। एक अध्ययन के अनुसार, ब्राउन राइस जैसा होल ग्रेन शरीर के बीएमआई और फैट पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

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