कोसली: प्रथम युद्ध में भी यहां के लोगों ने भाग लिया

 कोसली: प्रथम युद्ध में भी यहां के लोगों ने भाग लिया 

फोटो: मुगल सराय

रिवाड़ी से लगभग 29 किलामीटर की दूरी पर स्थित दक्षिणी हरियाणा का यह कस्बा भी अपने साथ अनेक ऐतिहासिक प्रसंगों को जोड़े हुए है। ब्रिटिश इतिहासज्ञ डब्ल्यू ई पारसर के अनुसार यहां के अहीरों का संबंध भी राव राजा तुलाराम के पौत्र के साथ जुड़ा है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार इसकी स्थापना वर्ष 1193 में दिल्ली के एक तत्कालीन सम्राट के पौत्र कोसल देव सिंह ने की थी। यहां की धरती का संबंध एक प्रख्यात संत बाबा मुक्तेश्वर पुरी महाराज की तपस्थली के रूप में भी चर्चित है। अब भी यहां के अधिकांश मूल निवासी अपना संबंध चंद्रवंशी यादव गोत्र कोसलीया के साथ जोड़ते हैं।

सेना में इस क्षेत्र के लोगों का बाहुल्य है। ब्रिटिश शासन में यहां के लगभग 70 सैनिकों को ‘सीनियर कमीशंड आफिसर’ का पद प्राप्त था और प्रथम विश्व युद्ध में भी यहां के 247 सैनिकों ने भाग लिया था। अब भी यहां के सैनिकों-पेंशनरों की संख्या सैकड़ों में है। रेल मंत्रालय ने यहां विशिष्ट निर्माण कार्य भी कराए थे। बाबा मुक्तेश्वर पुरी का एक विशाल मठ भी यहां स्थापित है, जहां बाबा की स्मृति में  हर वर्ष होली का पूर्व मनाया जाता है। यहां के लोगों को इस बात का भी गर्व है कि इस क्षेत्र के वीर सैनिकों ने द्वितीय विश्वयुद्ध के मध्य भी बड़ी संख्या में भाग लिया था। इस क्षेत्र के सैनिकों को चार शौर्य चक्र, दो महावीर चक्र, दो अशोक चक्र व दो मिल्ट्री-क्रॉस प्राप्त हुए थे। यहीं के एक नायब कमांडेंट राव राम नारायण को वर्ष 1924 में राय बहादुर की उपाधि भी दी गई थी। उनके निवास पर 40 वर्ष तक ‘सैन्य आफिसर्स मैस’ भी सक्रिय रही थी।

घरौंडा: पहले इसका नाम घरौंदा हुआ करता था

चंडीगढ़-दिल्ली सडक़ मार्ग पर चंडीगढ़ से लगभग 135.9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित घरौंडा नई दिल्ली से सि$र्फ 99.6 किलोमीटर दूर है। किवदंती यही है कि इसका नाम पहले ‘घरौंदा’ था जो बाद में घरौंडा बन गया। शुरुआत में यह करनाल का ही एक भाग था और इस पर मुगल शासक मुहम्मद शाह का ही शासन था। बाद में मराठों ने इस पर आधिपत्य जमा लिया। 18वीं सदी के मध्य में इस पर पूरी तरह से ब्रिटिशों ने अधिकार जमा लिया। शेरशाह सूरी मार्ग पर स्थित इस उपनगर के समीप ही ‘कोस मीनारों’ का सिलसिला शुरू होता है। इन कोस-मीनारों को अब पुरातत्व-विभाग ने ‘संरक्षित क्षेत्र’ घोषित किया है और इनके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी नगर में एक पुरानी मुगल कालीन सराय के भी अवशेष हैं। इस सराय का एक द्वार दिल्ली गेट कहलाता है तो दूसरा लाहौरी-गेट। घरौंडा क्षेत्र को राजपूत-बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। 

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