'पिता से कोई रिश्ता नहीं रखती तो बेटी खर्च की हकदार भी नहीं'

जन संदेश न्यूज नेटवर्क


नई दिल्ली: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अगर बेटी अपने पिता के साथ कोई रिश्ता नहीं रखती है तो वह अपने पिता से किसी भी तरह के खर्च की हकदार नहीं होगी। जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की बेंच ने दोनों पक्षों के बीच विवाह टूटने से जोड़े को तलाक का फरमान सुनाते हुए फैसला सुनाया।

शीर्ष अदालत ने पति को सभी दावों के पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में 10 लाख रुपये की लागत जमा करने का निर्देश दिए हैं। यह राशि दो महीने के भीतर न्यायालय में जमा की जानी है जो अपीलकर्ता पत्नी को जारी कर दी जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जमा की तारीख से एक महीने की अवधि के लिए राशि की मांग नहीं की जाती है तो इसे 91 दिनों की अवधि के लिए एफडीआर अर्जित ब्याज में रखा जाएगा जिसे नवीनीकृत रखा जाएगा।

शीर्ष अदालत के अनुसार, जहां तक बेटी की शिक्षा और शादी के खर्चे का सवाल है उसके दृष्टिकोण से ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपीलकर्ता के साथ कोई संबंध नहीं रखना चाहती और उसकी उम्र करीब 20 साल है। वह अपना रास्ता चुनने की हकदार है लेकिन फिर अपीलकर्ता शिक्षा के लिए राशि की मांग नहीं कर सकती है। इस प्रकार हम मानते हैं कि बेटी किसी भी राशि की हकदार नहीं है लेकिन प्रतिवादी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में भुगतान की जाने वाली राशि का निर्धारण किया जाना चाहिए। हम अभी भी इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि अगर प्रतिवादी बेटी का समर्थन करना चाहता है तो उसे गुजारा भत्ता दे सकता है। गौरतलब है कि 1998 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दंपति की शादी हुई और 2001 में एक बेटी का जन्म हुआ था।

पति ने न्यायालय में दावा किया है कि बेटी अपनी मां और अपीलकर्ता (पिता) के साथ नहीं बल्कि उसके पिता के घर में दिसंबर 2002 में उसके निधन के बाद से रह रही है। फिर उसने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए एक याचिका दायर की लेकिन इसे 2004 में डिफॉल्ट पर खारिज कर दिया गया था। पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने अक्टूबर 2004 में उसे ससुराल से निकाल दिया और दहेज की मांग की। बेटी जन्म से ही प्रतिवादी के साथ रह रही है और इस तरह पत्नी ने तलाक की अर्जी मांगी थी।

बीमार पिता को भूखा-प्यासा घर में बंद रखते थे बेटा-बहू, 4 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

गाजियाबाद: इंसान का जमीन इस कद्र तक गिर जाता है कि वो अपने अभिभावकों के साथ भी बेकायदियां करने से गुजरेज नहीं करता। मसूरी थाना क्षेत्र में रहने वाले एक बुजुर्ग ने बेटे और बहू पर अत्याचार करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि वह लकवाग्रस्त हैं, इसके बावजूद बेटा-बहू उन्हें कमरे में भूखे-प्यासे बंद करके कई दिन के लिए बाहर चले जाते हैं और दवाई तक के लिए नहीं पूछते।

पिता को बुआ के घर छोड़कर आने के बाद बेटे ने तीन महीने तक उनकी सुध नहीं ली तो बुजुर्ग ने थाने पहुंचकर कार्रवाई की गुहार लगाई। बेटा-बहू के साथ-साथ बेटे के साले और दोस्त पर भी प्रताडि़त करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस का कहना है कि चारों के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

थाना क्षेत्र की वेब सिटी निवासी 71 वर्षीय हैरी फर्नांडिस के अनुसार, वह लकवाग्रस्त हैं और 22 साल पहले ही उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है। उनका बेटा और बहू उन्हें कई-कई दिन तक कमरे में भूखे-प्यासे बंद करके बाहर चले जाते हैं। इस दौरान खाना-पानी और दवाई के बिना वह तड़पते रहते हैं।

बुजुर्ग का आरोप है कि बेटा और बहू की यह यातना काफी समय से चल रही थी। वह अपनी बीमारी का हवाला देकर नसीहत देते थे लेकिन इसके बावजूद इल पर कोई असर नहीं होता था। बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि बेटा अपने साले और दोस्त के साथ घर पर शराब पीकर हुड़दंग करता है। वह विरोध करते हैं तो बेटे के साथ-साथ उसका साला व दोस्त भी गाली-गलौज करते हैं। इतना ही नहीं उनकी निजी जिंदगी में खलल डालने पर जान से मारने की धमकी देते हैं। बुजुर्ग का आरोप है कि वह घुट-घुटकर अपनी जिंदगी जी रहे हैं। बेटा-बहू उनका खर्च भी नहीं उठाते।



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