विश्व जल दिवस पर कृषक संगोष्ठी आयोजित
शस्य वैज्ञानिक डाॅ. चन्द्रशेखर शर्मा ने बताया कि मृदा व जल परीक्षण प्रयोगशाला में विश्लेषण रिपोर्ट से पता चलता है कि अधिकांशतः भूमिगत जल खारा है जो कि सिंचाई के योग्य नहीं है, इसके कारण मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है उन्हांेने कहा कि अतः किसान भाईयों को इसका उपयोग जल जांच के आधार पर ही करना चाहिये। वर्षा के बहते हुये पानी को बचाने के लिये भूमिगत रिचार्ज करना चाहिये।
गृह वैज्ञानिक डाॅ. संतोष ने महिलाओं को घरेलु स्तर पर जल बचत तकनीकी उपाय बताये। पशुपालन वैज्ञानिक डाॅ. मुकेश कुमार ने पशुपालन के दौरान सार सम्भाल करते हुये जल बचत तकनीकी उपाय बताये।
कृषि प्रसार शिक्षा वैज्ञानिक डाॅ. कुलदीप सिंह ने बताया कि प्रथम विश्व जल दिवस 22 मार्च, 1993 को मनाया गया। इस ‘‘भूमिगत जल को अदृश्य से दृश्य बनाना’’ थीम पर विश्व जल दिवस का आयोजन पुरे विश्व में हो रहा है ताकि ताजा जल कि महत्ता को समझा जा सके।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व सरपंच जण्डवाला सिक्खान बलजीत कौर ने कहा कि ‘‘जल ही जीवन है’’ अतः सभी को जल बचत के उपाय अपनाने चाहिये। कार्यक्रम में 32 महिला कृषक तथा कृषक उपस्थित हुये।


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