जन संदेश न्यूज नेटवर्क
चंडीगढ़: देश के पांच राज्यों के विस चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस का एक ओर नया संकट बढ़ता नजर आ रहा है। प्रदेश के दो बड़े नेताओं की बीच आकार लेते तनाव के चलते पार्टी के अंदर गुटबाजी शुरू हो गई है। खबर है कि राज्य में यह सियासी जंग प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रमुख कुमारी शैलजा और पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच जारी है। इधर, पार्टी नेतृत्व भी लगातार दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं।
माना जाता है कि हुड्डा को पार्टी के 31 विधायकों में से दो दर्जन से ज्यादा का समर्थन हासिल है। इसके अलावा कई पूर्व सांसद और मंत्री भी हुड्डा के वफादार गिने जाते हैं। जबकि शैलजा को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है।
रिपोर्ट में पार्टी पदाधिकारियों के हवाले से बताया कि हुड्डा, शैलजा को हटाकर अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को हरियाणा कांग्रेस का प्रमुख बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि रणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई जैसे कई नेता इस फैसले के खिलाफ हैं। खास बात है कि साल 2019 चुनाव से पहले हुड्डा खेमा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रमुख अशोक तंवर को पद से हटाने में सफलता मिली थी। तंवर ने कुछ समय बाद ही पार्टी छोड़ दी थी।
कौन ज्यादा लोकप्रिय!
25 मार्च को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राजधानी दिल्ली में सुलह कराने के लिए हरियाणा के नेताओं के साथ बैठक की थी। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान जमकर बहस हुई क्योंकि हुड्डा समर्थक राज्य में नेतृत्व बदलाव की बात पर जोर दे रहे थे। कथित रूप से दीपेंद्र ने राहुल से अपील की थी कि वे एक सर्वे करेंए जिससे पता चल रहे कि उनके पिता या शैलजा में से कौन ज्यादा लोकप्रिय है और किसे ज्यादा समर्थन हासिल है।
खबर है राहुल ने प्रदेश के नेताओं से कहा कि उन्हें 'सामूहिक जिम्मेदारी' की बात माननी पड़ेगी और चुनाव 'सामूहिक नेतृत्व' के तौर पर लडऩा होगा। पार्टी के हरियाणा प्रभारी विवेक बंसल ने इस बात को स्वीकारा कि 'पार्टी नेतृत्व के सामने गुटबाजी बड़ी चुनौती है।' अखबार से बातचीत के मुताबिक बंसल ने कहा, बिल्कुल, यह एक बड़ी चुनौती है जिसकी वजह से शीर्ष बॉस ने बैठक बुलाई थी। उन्होंने कहा, लेकिन, आप जल्दी देखें कि यह मुद्दा सुलझा लिया गया है। मुझे पूरा भरोसा कि मैं भविष्य में जल्दी इस मुद्दे को सुलझा लूंगा।
इधर, शैलजा ने पार्टी में किसी भी तरह के विवाद की बात से इनकार किया है। हुड्डा ने कहा, पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं है। जैसा कि शैलजा ने अखबार को बताए जाने के अनुसार, राहुल जी ने सभी लोगों को खुलकर बात करने के लिए कहा। सभी ने अपनी चिंताएं साझा कि और केवल हरियाणा ही नहींए बल्कि अन्य राज्य के भी सियासी हालात को लेकर चर्चा हुई।
उन्होंने आगे कहा कि मेरी चिंता संगठन को लेकर है जिसे मैंने सामने रखा। अन्य कई लोगों ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और यहां तक की राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रदर्शन के बारे में बात की। तो राहुल जी ने सभी की बातें सुनी और कहा कि सभी को साथ आकर सड़कों पर उतरना और लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सभी लोगों से एकजुट रहने के लिए कहाए ताकि जो पंजाब में हुआ उससे बचा जा सके। साभार मीडिया
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