बाल कहानी—- घीसू मान गया

घीसू किसी सामान को छूना मत। ले पकड़ बोरी। कोने में डाल और चुपचाप बैठ।
कहकर वो बर्तन माँजने लगी। घीसू की नजर आँगन में रखी कुर्सी पे पड़ी। लाल रंग की कुर्सी उसे भा गई। वो उसपे बैठने लगा। कमली ने देखा तो झट उसका हाथ जोर से खींच रोक लिया।
कितनी सुंदर कुर्सी है! माँ मुझे इसपे एक बार बैठने दे ना।
तू इसपे नहीं बैठ सकता। पर क्यों!
साहब को बिलकुल पसंद नहीं कि कोई बेबी के समान को हाथ भी लगाए।
ये सुन घीसू ने मुँह लटका लिया। कमली झाड़ू लगाने लगी। घीसू वहाँ पहुँच गया। टेबल पे रंग-बिरंगे खिलौने, फूल सजे थे। पास ही टैडी रखा था। ये दृश्य देख वह ठिठक गया। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
माँ, ये क्या है?
बेबी का खिलौना।
पहली बार ऐसा खिलौना देख वो ललचा गया। कमली का जवाब सुने बिना उसने झट से उठा लिया। गले से लगा खुशी से झूम उठा।
ये लडक़ा भी ना! अभी के अभी वापस रख।
माँ, थोड़ी देर खेल लेने दे।
नहीं! कमली ने उससे टैडी छीना। साड़ी के पल्लू से साफ करते हुए जगह पर रख दिया।
माँ, जिसका खिलौना है वो इससे क्यों नहीं खेलती।
खेलती है लेकिन तेरे जैसे दिनभर नहीं। उनका नाम टीना है। अभी वो स्कूल गई है।
माँ, ऐसा खिलौना मुझे दिला देगी?
तेरा जनमदिन आने दे। तब मैं सोचेगी।
कमली काम में लग गई। घीसू एकटक ललचाई आँखों से टैडी को देखता रहा। माँ, क्या टीना इस घर में टीना अकेली रहती है?
नहीं रे। उनके पापा, जिन्हें सब साहब कहते हैं। मम्मी अंकिता मेमसाब, उनके दादा-दादी सब लोग साथ में रहते हैं।
वो सब कहाँ गए?
साहब काम पे। दादा-दादी बाहर गाँव और मेमसाब की तबियत ठीक नहीं है। वो आराम कर रही हैं।
मेमसाब मेरा काम हो गया।
ठीक है, तुम जाओ।
आज तो छुट्टी है। तुम इतनी जल्दी क्यों उठ गईं? अंकिता ने टीना से पूछा।
मम्मी, सबसे पहले होमवर्क कम्प्लीट करना है। फिर पापा के साथ दिन भर मस्ती।
पापा को ऑफिस का काम करते देख टीना ड्रॉइंग करने लगी।
टीना, कमली आँटी से तुम्हारा कमरा साफ करवा दें?
ओके मम्मी!
टीना बैठक में ड्रॉइंग का सामान लेकर बैठ गई। वो फूल वाली ड्रॉइंग में रंग भरने में मगन थी।
घीसू, तेरे को मना किया ना! वो बेबी की गुडिय़ा है। हाथ मत लगा।
हाथ ही तो लगा था। क्या हो जाएगा!
टीना बेबी और उनके खिलौनों से दूर रह, समझा!
हओ।
अभी साहब देखेंगे तो कल से तेरा यहाँ आना बंद।
घीसू एक जगह कहाँ टिकने वाला था। थोड़ी देर बाद टीना को झाँक कर देखने लगा। फिर धीरे से कमरे में घुस गया। टैडी उठा खेलने लगा।
टीना बेटा, तुम यहाँ हो तो कमरे में कौन है?
साहब की बात सुनते ही डर के मारे घीसू के हाथ से टैडी छूट गया। वो पकड़ता उससे पहले पलंग के नीचे चला गया। डर के मारे उठाए बिना घीसू वहाँ से भाग खड़ा हुआ। टीना ने उसे भागते देखा तो आवाज़ लगाई।
अरे कहाँ जा रहे हो। इधर आओ, आपका नाम क्या है?
घीसू।
बताओ ये फ़्लावर कैसा लग रहा है?
दो फूलों में हरा, एक में नीला और दो को पीला रंग कर दे।
टीना ने जल्दी से कलर कर दिया। उसे बात मानता देख घीसू का डर जाता रहा।
घीसू, तुम्हारा सजेशन मानने से फूलों में सुंदरता बढ़ गई।
बेबी, सफाई हो गई। आप कमरे में जा सकती हो।
थैंक यू आँटी। कहकर टीना ने सारा सामान जगह पे रख दिया। टीना को टैडी जगह पे नहीं दिखा। वो ढूँढने लगी।
घीसू कमरे के बाहर खड़ा ये सब देख रहा था। वो टीना को पलंग के नीचे टैडी के गिरने वाली बात बताना चाहता था। अगले ही पल उसे माँ से सुनी साहब के गुस्से वाली बात याद आई। डर के कारण वह टीना से कुछ न कह सका। चलने ले लिए मुड़ा ही था कि टीना ने उसे बुलाया और कहा- घीसू, आपको रंगों की पहचान है। बहुत होशियार हो। वेरी गुड।
अपनी प्रशंसा सुन घीसू खुश हुआ। आज वो टीना के साथ टैडी से जी भरकर खेलना चाहता था।
मेमसाब मैं जाती। घीसू चल, घर चलें। कमली की आवाज़ सुन घीसू उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।
टैडी, टीना का फेवरेट टॉय था। वह उसके साथ ही सोती थी। आज उसे टैडी मिल नहीं रहा था। मम्मी की तबियत ठीक न होने के कारण टीना ने उनसे पूछना ठीक नहीं समझा। पापा ने टीना को दुखी देख कारण पूछा। उसने टैडी न मिलने की बात बताई। पापा को बहुत गुस्सा आया। उनका शक सीधे घीसू पे गया। कल कमली आँटी ढूँढ देंगी, ये कहकर उन्होंने टीना को तो समझा दिया। मन ही मन घीसू की हरकत पे ‘आग बबूला हो उठे।’
माँ, आज जन्मदिन है। तूने वादा किया था। खिलौना दिलाएँगे।
इस बार पैसे खत्म हो गए। अगली बार पक्का दिला दूँगी।
तू हर बार यही बहाना मारती है।
गुस्सा थूक दे और मान जा बेटा।
इस बार घीसू जिद में अड़ गया। उसने खाना भी नहीं खाया। रात में जोरदार आँधी और बारिश हुई। छत की टीन उड़ गई और पानी टपकने लगा। तेज बहाव से नाले का पानी घर में घुस आया। सारा सामान पानी में तैरने लगा। कमली ने घीसू को भीगने से बचाने के लिए पन्नी उढ़ा दी। हवा के झोकों में पन्नी उड़ गई। कमली घर का सामान बचाने में लगी रही। अचानक उसका ध्यान घीसू पे पड़ा- बेटा, तू तो काँप रहा है। शरीर भी तप रहा है।
तेज बुख़ार और भूख के मारे वो बेहोश हो गया। कमली तुरंत उसे अस्पताल ले गई।
मम्मी आज मेरी छुट्टी है। मैं घीसू के साथ ड्रॉइंग और कलर करूँगी। वो कब तक आएगा?
टीना, कमली आज नहीं आएगी।
क्यों?
घीसू, हॉस्पिटल में एडमिट है।
आपको कैसे पता?
उसके पापा आए थे बताने।
यह सुन टीना के पापा को विश्वास हो गया। उन्होंने अंकिता से कहा घीसू ने ही टैडी चुराया है। कमली ने काम पे न आने का बहाना इसीलिए किया है। अंकिता ने उन्हें बताया कमली झूठ नहीं बोलती। घीसू कब से आ रहा है। आज तक कुछ नहीं ले गया। गरीब कामवाली का बच्चा चोर हो ये ज़रूरी तो नहीं! घीसू चोरी नहीं कर सकता। मुझे उसपे पूरा भरोसा है।
अंकिता, तुम नहीं जानती इन लोगों को।
सच में घीसू हॉस्पिटल में भर्ती है। विश्वास न हो तो चलें देखने। तुरंत ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा।
चलो।
अंकिता ने शर्त रखी।
सुनो जी, यदि ये बात झूठ निकली तो आपको प्रायश्चित करना पड़ेगा।
कैसा प्रायश्चित?
ऐसा ही टैडी घीसू को गिफ़्ट करना पड़ेगा।
अंकिता, दिन में सपने देखना बंद करो।
आप शर्त हारने को तैयार हो। लगी शर्त।
लगा लो। वैसे भी मैं ही जीतुंगा।
पापा, जल्दी आओ। टैडी मिल गया।
कहाँ, कैसे?
मेरे पैर से धक्का लगा। बैलीज पलंग के नीचे चली गई। उसे निकालने झुकी तो टैडी मिल गया। यह सुन अंकिता के चेहरे पे जीत की मुस्कान बिखर गई।
मुझे घीसू की बहुत याद आ रही है। मम्मी, क्या हम घीसू को मिलने हॉस्पिटल नहीं जा सकते?
क्यों नहीं। जल्दी से तैयार हो जाओ। मार्केट होते हुए चलेंगे।
मार्केट क्यों?
आज घीसू का जन्मदिन है। उसे देने के लिए गिफ़्ट भी तो लेना है।
पापा, नीले बो टाई वाला टैडी लेंगे।
वो क्यों?
घीसू को बहुत पसंद है।
थोड़ी देर बाद टीना, पापा-मम्मी के साथ हॉस्पिटल पहुँच गई।
कैसे हो घीसू बेटा?
अंकिता मेमसाहब की आवाज़ सुन घीसू ने आँखें खोलीं। वो बोल नहीं पा रहा था।
उनसे हैपी बर्थ डे, सुन अचंभित हो गया। टीना ने बड़े प्यार से उसे-‘ये लो बर्थ डे गिफ़्ट’ कहा। टैडी पाकर उसकी आँखें खुशी से चमक उठीं।
ये सब देख कमली समझ गई ‘घीसू मान गया।’ 

-डॉ. प्रीति प्रवीण खरे
भोपाल, मप्र

कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

© all rights reserved
made with by templateszoo