मोटे लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा कितना?

किसी मोटे शख्स को देखकर ज़्यादातर लोग यही सोचते हैं कि वो खाता ज़्यादा होगा। बीमारी होने के बावजूद मोटापे को गंभीरता से नहीं लिया जाता है लेकिन ये जानलेवा भी हो सकता है। दरअसल, मोटापा अपने आप में तो एक बीमारी है ही लेकिन ये कई दूसरी बीमारियों का कारण भी है। ओबेसिटी फाउंडेशन इंडिया के मुताबिक़, भारत में करीब तीन करोड़ लोग मोटापे की परेशानी से जूझ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक़, आने वाले पांच सालों में ये आंकड़ा दोगुना हो जाएगा। 

तो क्या ओवरवेट होना और मोटापा एक ही चीज़ है?

ओवरवेट होना भी कई तरह का होता है। इसे बॉडी मास इंडेक्स के आधार पर तय किया जाता है। अगर किसी शख्स का बॉडी मास इंडेक्स 25 से 29।9 है तो डॉक्टरी ज़ुबान में उन्हें ओवरवेट माना जाएगा। वहीं अगर किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स 30 है तो उन्हें मोटापे की श्रेणी में रखा जाएगा। जैसे-जैसे बॉडी मास इंडेक्स बढ़ता जाता है मोटापे की श्रेणी भी बढ़ती जाती है। लेकिन अगर कोई ये सोचकर निश्चिंत है कि उसे मोटापा नहीं है और सिर्फ उसका वजऩ अधिक है तो ये गलत है। ओवरवेट होते ही स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ओवरवेट लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियां, स्ट्रोक, डायबिटीज, कैंसर, यूरिक एसिड बढऩे की वजह से जोड़ों के दर्द की परेशानी, गॉल-ब्लेडर से जुड़ी परेशानी हो सकती है। ऐसे लोगों को नींद से जुड़ी तकलीफ भी हो जाती है।

बॉडी मास इंडेक्स का मक़सद यह बताना है कि कोई व्यक्ति मोटा है, पतला है या सामान्य श्रेणी में आता है। इसकी मदद से पता चलता है कि सही वजन क्या होना चाहिए। व्यक्ति का वजन पता कर उनकी लंबाई से भाग दे कर बॉडी मास इंडेक्स का आसानी से पता लगाया जा सकता है। यहां जरूरी है कि शख्स की लंबाई मीटर स्क्वायर में हो। 

मोटापा होता कितने तरह का है?

आनुवांशिक मोटापा: आपने देखा होगा कि कुछ परिवारों में लगभग सभी लोग मोटे होते हैं। इसकी दो वजहें हो सकती हैं। हो सकता है कि परिवार में खाने-पीने की आदत की वजह से वो मोटे हों या फिर उनका मोटापा आनुवांशिक (जेनेटिक) हो। आनुवांशिक मोटापे से निजात पाना काफ़ी मुश्किल होता है लेकिन डाइट कंट्रोल करके इससे छुटकारा पाया जा सकता है। 

नर्वस ओबेसिटी: खाना खाने से वैसे तो दिमागी संतुष्टि मिलती है। लेकिन जिन लोगों को मनोवैज्ञानिक दिक्कत होती है या फिर अवसाद से ग्रसित होते हैं वो खाने के दौरान अपनी ही चिंताओं में लीन रहते हैं। ऐसे में अकसर भूख से ज़्यादा खाना खाते हैं जिसकी वजह से मोटापे के शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा हॉर्मोन्स के असंतुलन के चलते भी मोटापा होता है और ये हॉर्मोनल ओबेसिटी मोटापे का एक प्रकार है। इसी तरह जितना हम खाते हैं, अगर वो एनर्जी शरीर से बाहर नहीं निकले तो चर्बी के रूप में जमती चली जाती है। ये थर्मोजेनिक ओबेसिटी मोटापे का कारण बनता है।

मोटापा क्यों ख़तरनाक है?: डायटिशियन और वेलनेस एक्सपर्ट डॉक्टर शालिनी मानती हैं कि इसमें कोई शक़ नहीं है कि दिल से जुड़ी बीमारियों जैसे कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के पीछे मोटापा एक वजह है। मोटापा बढऩे के साथ ही बीपी बढऩे लगता है, मधुमेह हो जाता है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है और इन सबका संयुक्त असर कार्डियक अरेस्ट के रूप में नजर आता है। भारतीयों के मौजूदा डाइट में फ़ैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ती जा रही है और प्रोटीन की मात्रा घट रही है, जिसका सीधा असर दिल पर पड़ता है। इसके अलावा शारीरिक व्यायाम कम हो गया है, ऐसे में ख़तरा तो है ही।

ओबिसिटी फाउंडेशन की एक स्टडी के मुताबिक, 30 से ज़्यादा बीमारियां, मोटापे से जुड़ी हुई हैं, जिनमें गठिया, अनिद्रा, कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं। इन लोगों में आकस्मिक मौत का ख़तरा बढ़ जाता है। अमरीकन कॉलेज ऑफ़ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जो लोग मोटापे का शिकार होते हैं या मोटापे से पीडि़त होते हैं उनमें सडन कार्डियक अरेस्ट की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि मोटापा, दिल को कैसे नुकसान पहुंचाता है और कार्डियक अरेस्ट की वजह बनता है। पर सबसे जरूरी ये समझना है कि कार्डियक अरेस्ट है क्या?

सडन कार्डियक अरेस्ट और दिल के दौरे में फर्क़ होता है। दिल का दौरा तब आता है जब दिल को पहुंचने वाले ख़ून में किसी वजह से रुकावट आ जाए। वहीं कार्डिएक अरेस्ट में किसी गड़बड़ी की वजह से दिल अचानक काम करना बंद कर देता है। इस स्थिति में व्यक्ति बेहोश हो जाता है, सांस चलनी बंद हो जाती है और अगर तुरंत मदद न मिले तो जान भी जा सकती है। 

मोटापे से कैसे जुड़ा हुआ है कार्डियक अरेस्ट?: दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉक्टर विवेका कुमार के अनुसार मोटापा, सडन कार्डियक अरेस्ट की एक वजह हो सकता है। मोटापे के चलते कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है जो सडन कार्डियक अरेस्ट की वजह बनता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है ख़तरा बढ़ता जाता है। लेकिन इसका उपाय क्या है? इलाज से कहीं बेहतर है कि शुरू से ही सावधानी बरती जाए। जैसे ही वजऩ 4 या 5 किलो बढ़े, खुद को लेकर सतर्क हो जाएं क्योंकि अगर एक बार मोटापा बढ़ गया तो उसे कम करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए शुरू से ही ध्यान दें। खाने-पीने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा का संतुलन होना जरूरी है, खाने में फल, सलाद की मात्रा जरूर रखें, नियमित एक्सरसाइज़ करें। उन्होंने बताया कि ये आदतें सिर्फ़ दिल को ही स्वस्थ नहीं रखतीं बल्कि कई दूसरी बीमारियों से भी सुरक्षित रखती हैं। रोज़ व्यायाम करके शरीर का एक्स्ट्रा फ़ैट बर्न किया जा सकता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित रहता है। लेकिन मोटापे की समस्या बड़ी है तो डॉक्टर की सलाह से मेडिकल ट्रीटमेंट सही रहेगा। वैसे जिन लोगों को आनुवांशिक मोटापा होता है उन्हें भी इसकी सलाह दी जाती है।

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