‘पहले तो मैं सभी को सलाम करता हूं, फिर मैं ये पैगाम करता हूं, ये मत समझना कि मेवातियों को भूल गया हूं, मैं आपको तो याद सुबह-शाम करता हूं’ : चौ ओम प्रकाश चौटाला

मेवात के ऐतिहासिक गांव सिंगार से इनेलो की ‘परिवर्तन पदयात्रा’ हुई शुरू

इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

215 दिनों में सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में जाएंगे अभय सिंह चौटाला

हरियाणा की जनता अब चाहती है बदलाव: ओमप्रकाश चौटाला

मेवात/चंडीगढ़ : इनेलो सुप्रीमो एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने शुक्रवार को इनेलो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला की ‘परिवर्तन यात्रा’ के शुभारंभ पर मेवात जिले के गांव सिंगार में आयोजित एक जनसभा को संबोधित किया। इस सभा में जैसे ही ओमप्रकाश चौटाला पहुंचे तो गर्मजोशी के साथ लोगों ने नारे लगाए और जयघोष से पूरा मेवात गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों की थापों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला मंच पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि सही मायने में देश और प्रदेश को बचाने के लिए एक बहुत बड़े परिवर्तन की जरूरत है। ये परिवर्तन न केवल राजनीतिक लिहाज से जरूरी है बल्कि समाज के साथ-साथ खुद को बचाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है और ये तभी संभव होगा जब हम यह बदलाव स्वयं के भीतर से करेंगे।

इनेलो सुप्रीमो ने कहा कि लोगों के भीतर एक बड़ा बदलाव महसूस किया जा रहा है और इनेलो इस बदलाव की सूत्रधार बनेगी। उन्होंने कहा कि मेवात का इतिहास इस कदर बुलंद रहा है कि बदलाव की खातिर जब भी यहां से लड़ाई शुरू हुई है तो पूरे हरियाणा ने करवट बदली है। ऐसे में अब पुन: उसी इतिहास को दोहराने का वक्त आ गया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मेवात के इतिहास के बारे में भी लोगों खासकर नई पीढ़ी को अवगत करवाया और इसी बीच ये भी कहा कि वे अपने भाषण को अधिक लंबा नहीं करेंगे क्योंकि अब जुम्मे की नमाज अता करने का वक्त हो रहा है। इस बात पर भी लोगों ने खूब तालियां बजाईं।



 खास बात ये है कि अपना संबोधन शुरू करने से पहले इनेलो सुप्रीमो ने एक शेयर पढ़ते हुए कहा कि ‘पहले तो मैं सभी को सलाम करता हूं, फिर मैं ये पैगाम करता हूं, ये मत समझना कि मेवातियों को भूल गया हूं, मैं आपको तो याद सुबह-शाम करता हूं।’ इसके बाद उन्होंने अपने उसी पुराने अंदाज और शैली में विरोधियों को चेताते हुए अपना भाषण शुरू किया। चौटाला ने कहा कि मेवात परिवर्तन की इस लड़ाई में आज अपनी बड़ी भूमिका अदा करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि वर्ष 1927 में मेवात के राजा हसन खान मेवाती ने आगरा के पास राणा सांगा का साथ देते हुए बाबर से लड़ाई लड़ी और अपने बच्चों सहित कुर्बानी दी थी। मेवात कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटता और यहां के लोगों की परम्परा रही है कि मेवात जिसके साथ खड़ा होता है, वह हर लड़ाई में विजयी पाता है। चौटाला ने कहा कि इनेलो ने भी अब एक ऐसी लड़ाई की शुरूआत की है जो देश और प्रदेश के हित में हैं, ऐसे में सभी को चाहिए कि पहले की तरह इस बार भी इनेलो की इस परिवर्तन यात्रा में अपनी अहम भूमिका अदा करें और फिर वो दिन दूर नहीं जब इनेलो की न केवल सत्ता होगी बल्कि मेवात की पिछड़ों में नहीं बल्कि उन्नतशील जिलों में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई उनके खिलाफ है जिन्होंने देश को 80-20 के अनुपात में बांट दिया है, ये लड़ाई उनके खिलाफ है जिनके शासनकाल में किसान अपने ही खेत में मजदूरी करने को मजबूर हो गया है और ये लड़ाई उनके खिलाफ भी है जिनका मुख्य मकसद आम और कमेरे वर्ग को लूटना व पूंजीपतियों का घर भरना है। उन्होंने कहा कि अब हम सभी को मिलकर पुन: इनेलो को लाना है ताकि ऐसे कृत्य करने वालों को सबक सिखाया जा सके।

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