ये लड़ाई इनेलो की सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि इस देश और प्रदेश के कमेरे, किसानों, मजदूरों, गरीबों, कर्मचारियों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के भविष्य को लेकर है,
लोगों को जागने की जरूरत है और उन्हें यह परखने की जरूरत है कि:
क्या जुमलों के आधार पर देश और प्रदेश उन्नतशील हो सकता है?
क्या इसी झूठ के आसरे युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सकता है?
क्या इसी फरेब और जनविरोधी नीतियों के कारण गरीब का भला हो सकता है?
इनेलो नेता ने कहा कि कृषि के संसाधनों को महंगा कर दिया गया है। पैट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी हो गई है, कीटनाशकों के भाव बढ़ गए हैं लेकिन किसानों को उनके उत्पादों की सही कीमत नहीं मिल रही है। यह भी उस शासन में हो रहा है जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता पर काबिज होने से पूर्व किसानों से ये वादा किया था कि सरकार आने पर किसानों की आय दोगुणी होगी लेकिन आय तो दोगुणी नहीं हुई बल्कि किसानों पर कर्जा कई गुणा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के किसानों को एकजुटता के साथ फिर से वही इतिहास दोहराना होगा जब कृषि के तीन काले कानूनों की लड़ाई मिल कर लड़ी और सरकार को एकजुटता देख कर पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब 2024 के चुनावों में भी किसानों को फिर से एक होकर इस सरकार के खिलाफ लड़ाई लडऩी होगी। किसानों की इस दशा को देखते हुए इनेलो तो संघर्ष की राह पर चल रही है लेकिन इसमें हर वर्ग का साथ बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वास्वत में ये लड़ाई इनेलो की सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि इस देश और प्रदेश के कमेरे, किसानों, मजदूरों, गरीबों, कर्मचारियों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के भविष्य को लेकर है।



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