त्यागी व तपस्वी व्यक्तित्व के धनी थे ताऊ

6 अप्रैल 2023, जगत ताऊ देवीलाल समाज कल्याण योद्धा की 23वीं पुण्य तिथि थी । इसी दिन वर्ष 2001 में इस महान धरती पुत्र की आत्मा पवित्र मातृभूमि में विलीन हो गई और समस्त जनमानस के ऊपर ‘ताऊवाद’ की गहरी अमिट छाप छोड़ गई । वर्ष 1977 से 1979, वर्ष 1987 से 1989 तथा 1990-91 में इस महान नेता के राज्य के मुख्यमन्त्री व देश के उप प्रधान मंत्री शासन काल के दौरान बतौर हरियाणा पुलिस (गुप्तचर विभाग) के प्रमुख व वर्ष 2000-2001 में बतौर राज्य के पुलिस प्रमुख होने के नाते और उनसे नजदीकी सम्बन्ध होने से लेखक स्वंय को सौभाग्यशाली मानते हैं। 

एक बार वर्ष 1994 में चौ. देवी लाल से यह पुछे जाने पर कि उनके शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धी क्या है, के उत्तर में चौधरी साहब ने कहा कि समाज कल्याण के उपायों ‘वृद्धावस्था पैन्शन व ऋण माफी योजना’ मेरे शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धी है। यह पहला अवसर था जब किसी राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा/कल्याण के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम शुरू किये थे। उनका कहना था कि लोकराज लोकलाज से चलता है।

चौ. देवी लाल एक महान त्यागी व तपस्वी व्यक्तित्व के धनी थे। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री चन्द्रशेखर जी ने भारतीय संसद के केन्द्रीय हाल में खड़े होकर सार्वजनिक तौर से ताऊ के नाम को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया था लेकिन जननायक चौ. देवी लाल ने तुरंत अपने स्थान पर खड़े होकर पूर्ण विनम्रता के साथ इस प्रस्ताव को उसी समय ठुकरा दिया और स्वंय प्रधानमंत्री पद के ताज को श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के सिर पर रख दिया। ऐसा उदाहरण भारतवर्ष के इतिहास में शायद ही देखने को मिलेगा। 

जननायक चौ. देवीलाल भलीभांती जानते थे कि भारतवर्ष एक कृषि प्रधान देश है और ग्रामीण समाज अज्ञानता व बेरोजगारी से जूझ रहा है। उन्हें यह भी पता था कि किसानों, कामगारों, छोटे काश्तकारों एवं दुकानदारों, हरिजन व गरीब तबकेे के बच्चे न तो अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं और न ही उनके लिए अच्छी शिक्षा के लिए स्वतंत्र भारत में कोई साधन जुटाए गए हैं। अत: इस क्षेत्र में वे अमीरों, धनाढ्य वर्ग एवं साधन सपंन्न लोगों के बच्चों से काफी पीछे रह जाते हैं। लेकिन यदि उनका सरकारी नौकरियों में निश्पक्षता व योग्यता के आधार पर चयन किया जाए तो वे आगे आ सकते हैं। इसलिये उन्होंने अपने मुख्यमंत्री शासन काल मे बेरोजगार युवक एवं युवतीयों के परीक्षा व साक्षात्कार के लिए जाने हेतु नि:शुल्क बस यात्रा सुविधा प्रदान की थी। चौ. साहब इस बात से परिचित थे कि ग्राामीण समाज के अधिकतर बच्चे गरीबी के कारण अधर में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं और 25 से 30 प्रतिशत बच्चे ही केवल बड़ी मुश्किल से दसवीं या इससेे उपर की शिक्षा हासिल कर पाते है। उन्हें यह भी पता था की ग्रामीण बच्चों में खेलकूद की प्रतिभा की कोई कमी नहीं है इसलिए उनके शासनकाल में लगभग 1050 स्कूल खोले गए जिनकी संख्या 1966-1977 व 1979-1987 में खोले गए स्कूलों के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक थी। इसी प्रकार उन्होंने खेल प्रशिक्षकों की पर्याप्त नियुक्तियाँ की और नए खेल स्टेडियमों की स्थापना की । यह बड़ी हैरानी की बात है कि 1966-1967 में खेल विभाग का बजट केवल 1.29 लाख था।

ताऊ देवीलाल ने इस बजट को बढ़ाकर 214.50 लाख किया। यही नहीं स्वतन्त्र भारत के इस महान योद्धा ने 1987-1989 तक के अपने शासनकाल में खिलाड़ीयों के लिए पुलिस विभाग में 3 फीसदी के आरक्षण को प्रावधान करके न केवल खिलाड़ी वर्ग में एक नई उमंग पैदा की बल्कि समस्त भारतवर्ष में खेल जगत के लिए इसे एक क्रांतिकारी कदम कहा जा सकता है। इसी प्रकार उग्रवाद का उठकर मुकाबला करने के लिए वर्श 1986-1987 में कमांडो बटालियनों की स्थापना की और पुलिस विभाग को चुस्त और सुंदर व्यक्तित्व बनाने के लिए पुलिस भर्ती में आवश्यक बदलाव करते हुये भर्ती के लिये न्यूनतम ऊंचाई 5’7’’ से बढ़ाकर 5’9’’ तय की थी जोकि पूरे राष्ट्र में पुलिस भर्ती व्यवस्था में सबसे अच्छी शुरूआत साबित हुई। वे पुलिस व सशस्त्र सेवाओं मे योग्यता के आधार पर भर्ती के कटट्र पक्षधर थे और इस संबध में अपने निर्णय पर हमेशा अटल रहे। 

कृषि विकास में उनकी भरपूर रूची न केवल जगजाहिर है बल्कि इस बात से भी स्पष्ट होती है कि वर्ष 1989 में श्री वी.पी. सिंह ने ताऊ द्वारा प्रधानमंत्री पद का ताज पहनने के बाद जब उनको (ताऊ जी) को केन्द्र सरकार में अपना दायित्व निभाने के लिए आमंत्रित किया तो लेखक को मुख्यमंत्री निवास पर उसी दिन उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी मशां जाहिर की कि किसान-खेतिहर मजदूर के कल्याण के लिए में तो इस देश के कृषी मंत्री पद की इच्छा रखता हूँ और ऐसा ही हुआ। आँकड़े बताते हैं कि उनके मुख्यमंत्री शासनकाल की दो अवधियों के दौरान खाद्यान व तिलहन पदार्थो के उत्पादन में 37 लाख टन की वृद्धि हुई। इसी प्रकार कृषि के आधुनिकीकरण में उनका विशेष योगदान रहा। उनके शासनकाल के दौरान पूर्व शासनकालों के मुकाबले तकरीबन 5 हजार से अधिक टैक्टरों की संख्या में वृद्धि हुई। उन्होंने किसानों का मान सम्मान रखते हुए बड़े गर्व के साथ यह कहते हुए कि - टैक्टर तो किसान व खेतिहर मजदूर का एक गडडा है, टैक्टर का पंजीकरण शुल्क माफ किया जो कि उनके समय का एक ऐतिहासिक फैसला है। 

 इसी प्रकार से सिचाई के क्षेत्र में भी 17.2 फीसदी से भी अधिक सिंचित क्षेत्र कि वृद्धि हुई और लगभग 120000 से अधिक नलकूप लगाए गए जिनकी संख्या 29 वर्ष के दूसरे शासनकालों की अवधि से 30 प्रतिशत अधिक है। सहकारीता के क्षेत्र में भी जननायक चौ. देवीलाल का विशेष योगदान रहा। 29 वर्ष की कुल अवधि में 8 नई चीनी मिल लगाई गई और इस अवधि के 6 वर्ष यानी के चौ. देवीलाल के कार्यकाल में 2 नई चीनी मिल लगाई गई जो की कुल वृद्धि का 25 प्रतिशत है। 

इसके इलावा चौधरी साहब जन कल्याण योजनाओं को प्रशासन द्वारा व्यवहारिक तौर पर लागू करने की भी व्यक्तिगत रूप से पड़ताल करते थे। अपने ग्रामीण दौरे के दौरान किसी भी बुजर्ग व्यक्ति के कन्धे पर हाथ रखकर पूछ बैठते, भाई बुढ़ापा पैन्शन तो मिलती है ना, इस स्नेही व्यवहार से जब वह बुजर्ग भावूक हो जाता तो स्नेह से कहते तूं तो मेरी उम्र का लागै है, मेरे से पहले मत चले जाना’’। चौ0 साहब के स्नेहपूर्ण व्यवहार से समाज का हर वर्ग का किसान-मजदूर विशेषकर बुजूर्ग तबका बहुत प्रभावित था। 

इसके साथ ताऊ देवीलाल मानते थे कि किसान समाज का सबसे अधिक भोला, ईमानदार व देशभक्त समुदाय है इसलिए उन्होने वर्ष 1977 में किसानों के प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। मार्च 1978 में ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को बहुत हानि हुई जिसकी भरपाई के लिए हरियाणा सरकार ने 400 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया। चौ0 देवीलाल हर किसान व खेतीहर मजदूर को एक समान समझते थे इसलिए प्रभावित क्षेत्र के मजदूरों को भी आर्थिक सहायता प्रदान करते थे। मेरा यह मानना है कि इससे पहले देश में किसी भी राज्य सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुए फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं दिया। खेत के साथ लगती सडक़ पर यानि सरकारी भूमि पर खड़े वृक्षों का आधा मूल्य संबंधित किसान को दिये जाने का प्रावधान किया।

एक बार बीबीसी के संपादक/प्रवक्ता सर मार्क टली ने कहा था कि मुझे गर्व है कि जन नायक चौ0 देवीलाल मेरे मित्र थे। सर मार्क टली, बीबीसी समाचार सेवा के 1970 व 80 के दशक में प्रतिनिधि रहे और एक वरिष्ठ पत्रकार से भेंटवार्ता में उन्होने स्वंय कहा ‘‘यह स्पष्ट दिखाई देता था कि चौ0 साहब बहुत से लोगों को व्यक्तिगत रूप से जानते थे और ‘ग्रास रूट’ कार्यकर्ताओं से हमेशा सम्बन्ध बनाये रखते थे। यकिनन, उनके व्यक्तित्व के इस पहलू से मैं बहुत प्रभावित था। किसानों का हित तो हमेशा ही उनके लिए सर्वोपरि रहा है।’’ निम्नलिखित चित्र सर मार्क टली के उपरोक्त कथन को स्पष्ट करता है तथा चौ0 देवीलाल के व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है:-

लेखक को सुरक्षा के तौर पर जन नायक चौ0 देवीलाल के सरकारी दौरे के समय उनके साथ रहते हुए यह देखने का अवसर मिला कि जब भी भोले किसानों की तैयार फसलों की ओलावृष्टि आदि से हुई बरबादी को देखते तो स्वंय सरकारी गाड़ी से उतरकर खेतों के बीच में खड़े हो जाते और फसल की बरबादी को देखकर उनकी आंखों से अश्रुधारा निकल पड़ती। निम्नलिखित चित्र उपरोक्त कथन की सच्चाई से अवगत करवाता  है:-

सोनीपत (हरियाणा) के गांव जाट जोषी में 15 मार्च 1988 को ओलावृष्टि से हुए नुकसान को देखकर व्यथित जन नायक चौ0 देवीलाल सोनीपत (हरियाणा) के गांव जाट जोशी में 15 मार्च 1988 को ओलावृष्टि से हुए नुकसान को देखकर व्यथित जन नायक चौधरी देवीलाल न्याय युद्ध के बाद 1987 में ताऊ देवीलाल हरियाणा के पुन: मुख्य मंत्री बने। वे किसानों व मजदूर वर्ग की आर्थिक स्थिति से भली-भान्ति परिचित थे। उस समय के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 9 लाख किसान, छोटे कास्तकार व दुकानदार कजऱ् के बोझ तले दबे हुए थे और इस श्रेणी के लोगों को राहत पहुंचाने के लिए 10 हजार तक के कर्जो को एकमुश्त माफ कर दिये और तकरीबन 2 लाख अनुसुचित जाति व पिछड़े वर्ग के कर्जो को भी माफ किया जिसकी रिपोर्ट प्रधान मंत्री श्री पीवी नरसिम्हा राव के शासनकाल में 1991-92 के अधिवेशन के दौरान स्वंय केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री ने पेश की थी।

तत्कालीन केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री दलबीर सिंह ने स्वयं कहा था कि जन नायक चौ0 देवीलाल ने बतौर भारतवर्ष के उप प्रधान मंत्री सारे देश में विभिन्न प्रदशों के 16 हजार करोड़ रूपये के कर्जे माफ किये। वर्तमान रूपये के मुल्यांकन के अनुसार यह कर्जा माफी की राशी लगभग एक लाख 60 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक बनती है जबकि वर्तमान केन्द्रीय सरकार की घोषणा के मुताबिक केवल 60 हजार करोड़ रूपये की राशी के कर्जे माफ किये गये हैं। अत: जन नायक चौ0 देवीलाल सही मायने में जन कल्याण योजनाओं व किसान कल्याणकारी योजनाओं के सुत्रधार थे।

मैं ऐसे कर्मयोगी-किसान, कामगार व गरीबों के मसीहा जननायक ताउ देवी लाल को शत्-शत् प्रणाम/नमन करता हुआ अर्ज करता हुँ:-

वह कभी मरता नहीं, जिसकी खूबियाँ हो बाकी। 

वह गायब नहीं जिसका जिक्र हो बाकी।।

वे सदैव कहते थे-गरीब को ना सताना वो रो देगा। सुनेगा उसकी परमात्मा जड़-मूल से खो देगा। इसीलिये उन्होंने अपनी 2000 एकड़ से अधिक भूमि मुजारों को दान करके समस्त राष्ट्र में एक मिसाल कायम की जिस कारण आज भी उनको गरीबों के मसीहा के तौर पर याद किया जाता है।

लेखक

डॉ. महेंद्र सिंह मलिक

आईपीएस (सेवानिवृत)




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