जन संदेश न्यूज नेटवर्क
चंडीगढ़: इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के जेल जाने के बाद बादल साहब ने चौटाला परिवार का पूरा ध्यान रखा और बड़े बुजुर्ग की तरह परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें मान सम्मान दिया। यह बात अलग है कि एसवाईएल के मुददे पर इनेलो और अकाली दल का गठबंधन हरियाणा विधानसभा में टूट गया है। गठबंधन तोडऩा इनेलो की यह एक राजनीतिक मजबूरी थी क्योंकि एसवाईएल का मुददा हरियाणा के हितों से जुड़ा हुआ था। अन्यथा कोई राजनीतिक मुददा आज तक दोनों परिवारों को अलग नहीं कर सका।
जिस समय जेबीटी भर्ती में पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला और डा अजय चौटाला को सजा हुई। उस समय बादल परिवार इनेलो के साथ खड़ा नजर आया। प्रकाश सिंह बादल ने परिवार के मुखिया के तौर पर चौटाला परिवार का साथ दिया। यहां तक कि कुरुक्षेत्र रैली में उस समय इनेलो महासचिव अभय सिंह चौटाला ने यहां तक कहा कि बादल साहब हमारे परिवार के मुखिया है जो निर्णय वे लेंगे हमें मंजूर होगा।
चौटाला परिवार टूटने से बचाने का किया था प्रयास
जिस समय इनेलो से अलग होकर जजपा बनी। हरियाणा में देवीलाल परिवार के लिए यह संकट का समय था लेकिन संकट के इस समय में प्रकाश सिंह बादल ने परिवार को एक रखने का भरसक प्रयत्न किया। उन्होंने अभय चौटाला और दुष्यंत चौटाला दोनों को समझाया कि परिवार में मन मुटाव होते रहते हैं लेकिन परिवार का एक रहना जरूरी है। परिवार अलग हो गया वह बात अलग है लेकिन बादल ने अपने प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ी।
हरियाणा की राजनीत में एक किस्सा और मशहूर है। पंजाब में अकाली दल की सरकार बनी और प्रकाश सिंह बादल ने बिक्रम सिंह मजीठिया को मंत्री बनाने से इन्कार कर दिया। बादल को डर था कि पार्टी पर परिवारवाद के आरोप लगेंगे। उस समय मजीठिया के करीबी ओम प्रकाश चौटाला के पास आए और चौटाला ने मजीठिया को मंत्रिमंडल में शामिल करने की बात की। चौटाला की बात बादल भी नहीं टाल सके। पंजाब की सियासत के मजबूत स्तंभ रहे पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का हरियाणा की राजनीति में भी पूरा दखल रहा है। इनेलो अकाली गठबंधन के चलते हरियाणा में अकाली दल का भी पूरा दखल रहा है। कई सूबे की कई सीटों पर इनेलो ने अकालियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार भी बनाई है।
बादल साहब हमारे परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति: अभय
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि बादल साहब किसानों के मसीहा और राजनीति के पुरोधा थे उनका निधन न केवल हमारे परिवार के लिए बल्कि किसानों और समूचे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। वे हमारे परिवार के मुखिया थे। उनके निधन से मन बेहद व्यथित है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 दशकों से सरदार प्रकाश सिंह बादल का हमारे परिवार से अटूट रिश्ता रहा है।इनेलो सुप्रीमो चौधरी ओम प्रकाश चौटाला और वो स्वयं बुधवार को बादल साहब को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना के चलते इनेलो सुप्रीमो की जिला स्तरीय बैठकें और परिवर्तन पदयात्रा के कार्यक्रमों को बुधवार और वीरवार 2 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया था। आपातकाल के दौरान उनके दादा चौधरी देवीलाल और सरदार प्रकाश सिंह बादल 19 महीने तक जेल में रहे।
देश की राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा चेहरा थे प्रकाश सिंह बादल
प्रकाश सिंह बादल ने संकट के समय में अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनने में खूब सहयोग दिया था। वर्ष 1996 में उन्होंने आठ अकाली और चार इनेलो के 12 सांसदों का समर्थन अटल बिहारी वाजपेयी को दिया था। अकाली दल की भाजपा के साथ मजबूत रिश्तों की नींव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार के समय पड़ी थी।
उस वक्त लोकसभा चुनाव में उतरे 13 अकाली उम्मीदवारों में से आठ ने जीत दर्ज की थी। इन अकाली सांसदों के साथ प्रकाश सिंह बादल दिल्ली स्थित पंजाब भवन पहुंचे थे। तब केंद्र में एचडी देवगौड़ा की अगुवाई में सरकार बनाने की कवायद चल रही थी।
इसकी जानकारी मिलने पर प्रकाश सिंह बादल ने अटल बिहारी वाजपेयी से मिलकर समर्थन देने का वादा किया। बादल जब पंजाब भवन लौटे तो अकाली नेताओं ने उनसे देवगौड़ा सरकार में शामिल होने का आग्रह किया। इस पर बादल ने स्पष्ट किया कि जिस सरकार को कांग्रेस का समर्थन होगा अकाली उसमें शामिल नहीं होंगे।
तीन कृषि कानून बने भाजपा से दूरी का कारण
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के दौरान प्रकाश सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। बादल ने लिखा था यह यकीन करना बेहद कठिन है कि इतने भारी बहुमत वाली सरकार निर्णय लेने में नाकामयाबी को रोक नहीं पा रही है। इसके बाद अकाली दल और भाजपा के रिश्ते टूट गए और बादल की बहू हरसिमरत कौर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
प्रकाश सिंह बादल की बेटी की शादी आदेश प्रताप कैरों के साथ थी। उस समय बादल दक्षिण भारत की किसी जेल में बंद थे। उनके समर्थक उनके पास गए कि शादी के नाम पर पैरोल आसानी से मिल जाएगी। वे शादी में शामिल हो जाएं। उस समय बादल ने कहा था कि मेरे बड़े भाई देवी लाल हरियााण में हैं। शादी की सभी रस्में मेरे स्थान पर वे निभाएंगे। तब देवी लाल ने बादल की बेटी का कन्यादान किया था। उप प्रधानमंत्री रहते हुए सभी प्रोटोकाल दरकिनार कर देवी लाल बादल से मिलने दक्षिण भारत गए थे।

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