चुनावी नारे भांति-भांति के जिन्होंने सत्ता भी पलट दी

 

चुनावों के दौरान जुमले और नारे... किसी भी चुनाव में सबसे अहम भूमिका निभाने का काम करते हैं। चुनाव प्रचार में देशभर की राजनीतिक पार्टियां जनता को लुभाने और वोट हासिल करने के लिए इनका इस्तेमाल करती हैं। नारों का भी अपना एक इतिहास रहा है। चुनावी इतिहास में इन नारों ने न सिर्फ लोगों को लुभाने का काम किया बल्कि सत्ता को भी पलटकर रखा है। इस महीने देश के पांच राज्यों में विधानसभा होने हैं और सभी पार्टियां जीत हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। 

अलग-अलग पार्टियां चुनाव जीतने के लिए एक से बढ़ कर एक नारे लगा रही हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या इतिहास की तरह इस बार भी नारे सत्ता बदलने का काम करेगी या नहीं, ये तो समय ही बताएगा। वो मशहूर नारे जिन्होंने सत्ता को पलटकर रख दिया था, आइए जानते हंै-

वर्ष 1951 के आम चुनाव में कांग्रेस  पार्टी का नारा

भारत की आजादी के बाद 1951-52 में देश में पहला आम चुनाव हुआ था। इस चुनाव में कई बड़ी ऐतिहासिक घटना हुई थी जैसे कि दुनियाभर में सबसे अधिक लोगों को मतदान का अधिकार मिला था। इस आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी का एक नारा था- ‘स्थायी, असांप्रदायिक, प्रगतिशील सरकार के लिए।’

वर्ष 1962 के तीसरे आम चुनाव में जनसंघ का नारा

1962 में लोकसभा का तीसरा आम चुनाव था। कांग्रेस पार्टी ने 488 सीटों पर चुनाव लडक़र 361 पर जीत हासिल की थी। दूसरे आम चुनाव की तरह इस बार भी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) रही। जनसंघ की सीटों में 1957 के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा का इजाफा हुआ। तब जनसंघ ने नारा दिया था, ‘वाह रे नेहरू तेरी मौज, घर में हमला बाहर फौज।

एक ऐसा नारा जिसे लोग आज तक याद करते हैं और वो नारा है- ‘इंदिरा हटाओ, देश बचाओ’। यह नारा इमरजेंसी के वक्त जनता पार्टी ने दिया था। इसके अलावा 1989 के लोकसभा चुनाव में एक नारा बेहद मशहूर हुआ था- ‘गालों पर जो लाली है, तोपो की दलाली है’। यह नारा वीपी सिंह की पार्टी का ही था। इसके अलावा एक और नारा था- ‘राजा नहीं फकीर है, भारत की तकदीर है।’

बीजेपी का एक मशहूर नारा था जो  वर्ष 1991 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान दिया गया- ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।

ये हैं अब तक के कुछ मशहूर नारे

प कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ, यह नारा कांग्रेस ने 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिया था।  

प विधानसभ चुनाव में बहुजन समाजवादी पार्टी के दो नारे बेहद प्रचलित हैं जो पार्टी ने साल 2007 में दिया था पहला नारा- चढ़ गुंडों की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर और दूसरा नारा था- हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा, विष्णु, महेश है। 

2012 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने एक नारा दिया था जो आज भी प्रचलित है। नारा था- जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है।

एक नारा जिसने पूरी सत्ता पलटने में अहम भूमिका निभाई थी और यह नारा था- अच्छे दिन आने वाले हैं, 2014 के लोकसभा चुनाव में यह नारा नरेंद्र मोदी ने दिया था। 

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का नारा था- एक बार फिर मोदी सरकार। वहीं वर्ष 2017 के चुनाव में बीजेपी ने नारा दिया था- न गुंडाराज न भ्रष्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार।

विधानसभा चुनाव 2022 के लिए दलों के नारे

इस बार भी कई नारे दिए गए हैं जैसे ‘जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे’। यह नारा बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के लिए दिया है। सपा का नारा है- ‘22 में बाईसकिल’। सपा के एक और नारा है- ‘कृष्णा-कृष्ण हरे हरे’ अखिलेश भैया घरे घरे’। वहीं अगर कांग्रेस का नारा है- ‘’लडक़ी हूं, लड़ सकती हूं’। फिलहाल ये नारे जनता के मन को कितना बदल सकते हैं ये तो वक्त ही बताएगा। 

साभार मीडिया

कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

© all rights reserved
made with by templateszoo