विश्व दलहन दिवस का आयोजन
संगरिया - केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. अनूप कुमार ने दलहन की मनुष्य जीवन में उपयोग की जानकारी देते हुये कहा कि हमें प्रतिदिन 80 ग्राम दलहन की आवश्यकता बताई। इसके साथ उन्होंनें किसानों को दलहन के उत्पादन बढ़ाने की उन्नत तकनीकों की जानकारी देते हुये मनुष्य में उत्पन्न कुपोषण की समस्याओं से अवगत करवाया। इन्होंनें दलहन को पादप प्रोटीन तथा आयरन का मुख्य स्रोत बताया तथा कहा कि नियमित रुप से दालों का उपयोग कर कुपोषण से निजात पाया जा सकता है।
"किसानों को वर्तमान चना फसल में कीट, रोग व पोषक तत्वों के प्रबन्धन की जानकारी देते हुये समय पर निदान करने की सलाह दी"
केन्द्र के पौध संरक्षण वैज्ञानिक डाॅ. उमेश कुमार ने किसानों को वर्तमान चना फसल में कीट, रोग व पोषक तत्वों के प्रबन्धन की जानकारी देते हुये समय पर निदान करने की सलाह दी। इसके साथ उन्होंनें एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन की जानकारी देते हुये इसे अपनाने के लिये किसानों को कहा जिससे खेती में उपयोग होने वाले अनावश्यक जहर को रोका जासके। इसी दौरान केन्द्र पर लगे फसल संग्र्रहालय में लगे चने की विभिन्न किस्मों की विशेषता बताते हुये भविष्य में किसान अपने खेत पर लगाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करें। केन्द्र के पशु वैज्ञानिक डाॅ. मुकेश कुमार ने कार्यक्रम में आये किसानों को पशुपालन की जानकारी प्रदान की। केन्द्र के वरिष्ठ अनुसंधान सहयोगी डाॅ. नरेश कुमार ने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट की जानकारी प्रदान की। इस कार्यक्रम में 44 किसानों ने भाग लिया।
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