सदाबहार पौधों को बचाकर रखें पाले से


इस महीने में ठंड पडऩी शुरू हो जाएगी। इसलिए सदाबहार पौधों को पाले से बचाना आवश्यक है। जहां तक संभव हो सके बागों की सिंचाई से बचाना आवश्यक है। जहां तक संभव हो सके बागों की सिंचाई भी करते रहे ताकि पाले का कम से कम असर हो। इस महीने करीब-करीब सारी फसलों में कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी खाद भी डाले और आने वाले बसंत मौसम में सदाबहार के पौधे लगाने के लिए खड्ढों की खुदाई व भराई का काम शुरू कर दें ताकि पौधे फरवरी के शुरू में ही लगाए जा सकें। आडू व अलूचा के पौधे दिसंबर के अंत तक लगाए जा सकते हैं।

संगतरा, माल्टा, नींबू आदि

पके फलों को इस माह तोड़ लें अन्यथा वे खराब हो सकते हैं। बाग से घास-फूस नष्ट करके सफाई करें। गुड़ाई चार-छह इंच से गहरी न करें। इस माह के अंत तक पौधों को निम्नलिखित मात्रा में गोबर की खाद दें और सिंचाई भी करें। बाग की सिंचाई 15 दिन में एक बार करें। पुराने बागों में पेड़ों की सूखी हुई लकड़ी व शाखाओं को काटें। सूखी व कैंकर रोगी टहनियों को काटकर 300 ग्राम कॉपर आक्सोक्लोराइड या 10 ग्राम स्टैप्टोसाइक्लिन-10 ग्राम कॉपर सल्फेट को 500 लीटर पानी में बिने घोल में तीन छिडक़ाव करें।

आम: मिलीबग के बच्चे जमीन में से निकलकर तनों से होकर पौधों पर चढ़ते है। इनको चढऩे से रोकने के लिए जमीन से 0.5 से एक मीटर की ऊंचाई तक 25-30 सेंमी. चौड़ी अल्काथीन (400 गाज की पॉलिथीन) की पट्टी लगाएं। इस पट्टी को लगाने से पहले तने की सूखी छाल को कुल्हाड़ी से उतारकर बराबर कर लें। फिर पांच सेंमी. चौड़ी गरम लुक (तारकोल) की तह पर अल्काथीन नीचे व ऊपर चिपकाएं। अल्काथीन मुलायम होने के कारण कीड़े ऊपर नहीं चढ़ सकेंगेे। पौधों का अन्य भाग जमीन से नहीं छूना चाहिए। यह काम मध्य दिसंबर तक कर लें।

सूखी व रोगी टहनियों को काट दें। 0.3 प्रतिशत कॉपर आक्सीक्लोराइड के घोल (300 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड 100  लीटर पानी में) से छिडक़ाव करें।

बेर: दर्मियानी व पछेती किस्मों में सफेद चूर्णी या पाउडरी मिल्ड्यू से बचाव के लिए घुलनशील गंधक (400 ग्राम 200 लीटर पानी में) या केराथेन (200 मिली. 200 लीटर पानी में) का घोल बनाकर छिडक़ाव करें। मध्य दिसंबर या जनवरी के शुरुआत में फल मक्खी के लिए 600 मिली. मैटासिस्टॉक्स 25 ईसी या 500 मिली. रोगोर 30 ईसी को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिडक़ें।

अनार, आडू व अलूचा

इस माह के अंत में कटाई-छंटाई आरंभ कर सकते हैं। प्रति पौधा 25-35 किलो. गोबर की सड़ी खाद माह के अंत तक डालें और अच्छी गुड़ाई करके बाग की सिंचाई करें।

अमरूद: बाग की सिंचाई करें व फसल की देखभाल करें। इसके अलावा अंगूर की कटाई-छंटाई का कार्यक्रम जनवरी माह में करना होगा इसलिए कैंची, ब्लाइटॉक्स या बेनलेट और जिंक सल्फेट आदि का प्रबंध अभी से करें। कृषि विज्ञान केंद्र में जिला विस्तार विशेषज्ञ (बागवानी) से भी संपर्क करें और कटाई-छंटाई अभियान में भाग लेने के लिए कार्यक्रम निश्चित कर लें।


कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

© all rights reserved
made with by templateszoo