यूपी चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने बदली रणनीति बड़ी रैलियों के बजाय छोटी सभाओं पर जोर
सभाओं के मामले में विरोधियों से आगे निकली भाजपा
सभाओं के मामले में भाजपा अपने विरोधियों से बहुत आगे निकल चुकी है और वह इसे और आगे ले जा रही है। पार्टी की रणनीति ज्यादा से ज्यादा संपर्क और संवाद करने की है। दरअसल, इस बार के सामाजिक समीकरण पिछली बार की तुलना में कुछ बदल सकते हैं। इसकी वजह कांग्रेस और बसपा का जमीन पर कमजोर दिखना है। समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दल भाजपा विरोधी मतों को एक साथ लाकर इस स्थिति का लाभ लेने की कोशिश में है। ज्यादा सभाओं के जरिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय कर रही है। यह बात भी सामने आई थी कि भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के कार्यक्रमों में तो पूरी ताकत से जुटते हैं लेकिन व्यक्तिगत तौर पर जनसंपर्क में कमी दिखाई दे रही है। ऐसे में भाजपा के नेता जगह जगह पहुंच रहे हैं ताकि कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जनता के बीच जा सके। हाल में कोरोना प्रोटोकाल में जब सभाओं पर रोक थी तब जनसंपर्क में भी पार्टी के बड़े नेता उतरे थे। इस दौरान जो माहौल बना उसे पार्टी काफी लाभदायक मान रही है। बड़े नेताओं की घर-घर दस्तक से कार्यकर्ताओं में भी उत्साह आया है। हालांकि इसके लिए पार्टी को अपने विभिन्न नेताओं को गांव गांव तक पहुंचाना पड़ रहा है ताकि कार्यकर्ताओं की शिथिलता दूर की जा सके। पार्टी का जोर बूथ मैनेजमेंट पर ज्यादा है और कोशिश है कि वह अपने समर्थकों ज्यादा से ज्यादा मतदान कराने के लिए ला सके।
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