काम के पूरे दाम न मिलने से मनरेगा मजदूरों में गुस्सा
कैथल: गांव भूसला के मनरेगा मजदूरों ने पूरी मजदूरी न मिलने और अधिकारियों द्वारा अभद्र व्यवहार करने पर प्रदर्शन किया। इस बारे में विधायक ईश्वर सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए मजदूरों ने कहा कि गत 22 अक्तूबर को उन्हें 10 दिन का काम मनरेगा कानून के तहत गांव टटियाना में मिला था। उसके बाद काम की मांग करने के बावजूद भी हमें कोई काम नहीं दिया गया था। मजबूर होकर उन्हें सीएम विंडो के माध्यम से मुख्यमंत्री के पास शिकायत करनी पड़ी तब जाकर 161 मजदूरों को 12 से 19 फरवरी तक 7 दिन का काम कर्मगढ़ माईनर पर दिया गया।
प्रत्येक मजदूर का घर से कार्यस्थल पर आने जाने का वाहन किराया 60 रुपए प्रतिदिन आया है। जितना काम मेट ने उन्हें दिया, वह सारा काम हमने पूरी मेहनत व लगन से पूरा कर दिया था। परंतु बड़े खेद की बात है कि मजदूरों के हस्ताक्षर, अंगूठे करवाए बिना ही 7 दिन की मजदूरी प्रति मजदूर 771 रुपए हमारे खातों में डाल दिए गए हैं जो कि मजदूरों के साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी व अन्याय है। यदि 7 दिन का वाहन किराया 420 रुपए निकाल दें तो मजदूरी राशि मात्र 329 रुपए बचती है। उन्होंने बार-बार मेट और जेई को कहा था कि मजदूरों की जितनी भी मजदूरी की राशि बनती है, वह मजदूरों की आंखों के सामने मस्टररोल में भरकर फिर हस्ताक्षर व अंगूठे लगवाए जाएं परंतु जेई ने ऐसा नहीं किया। 17 फरवरी को उन्हें सूचना दी गई कि अब काम पर नहीं आना है। मजदूरों को आरोप है कि जब भी वे बीडीपीओ कार्यालय में अपने समस्या बताने जाते हैं तो एबीपीओ डॉ. सुरेश कुमार मजदूरों के साथ दुव्र्यवहार करते हैं। उन्होंने विधायक से अपील की कि मनरेगा अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाई जाए। काम मांगने पर 15 दिन में काम या बेरोजगारी भत्ता दिलवाया जाए।
मनरेगा मजदूरों को 150 दिन के काम की गारंटी मिले
इन्द्री: मनरेगा मेट मजदूर संघ ने अपनी समस्याओं को लेकर मांगपत्र स्थानीय विधायक के नाम सौंपा। स्थानीय सिंचाई विभाग के विश्राम गृह में प्रधान सबीर अहमद, मामू राम, प्रवीन जावेद खान, रामरतन कश्यप, अनूप सिंह, अशोक कुमार, अजय कुमार, अनु कुमार, साहब सिंह, राजबीर व रमन कुमार सहित अनेक मेट इक_ा हुए। विधायक के पीए नवीन कुमार ने मनरेगा मेट को उनकी मांगें विधायक तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। प्रधान सबीर अहमद ने कहा कि मनरेगा मेट की नियुक्ति ग्राम पंचायत से हटाकर खंड स्तर पर करनी चाहिए। मनरेगा मेट अन्य विभागों की तरह अर्धकुशल दैनिक मजदूरी दी जाए। मजदूरों को सौ दिन के बजाय 150 दिन के काम की गारंटी दी जाए।
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