सबकै धोरै सै...
रुल्दू उसका दोस्त तै बोल्या- भाई साब, घरवाली दो प्रकार की ओया करैं। दोस्त बोल्या- किए तरियां। रुल्दू बोल्या- एक तो घरवाली वो ओवै जो अपणा घरआला की बात सुणै अर उसकी सारी आच्छी-बुरी बातां पै भी विचार करै, हर बार उसतै प्यार तै बात करै, कदे भी घरवाला तै कोए फरमाइश ना करै अर घरवाला कितणा भी गुस्सा मैं ओ फेर भी मुस्करांदी रवै। अर दूसरी घरवाली वा ओवै जो सबकै धारै सै।
पैर काटैगा के...
फत्तू का छोरा की टांग मैं डाकदर नै टांगे ला राक्खे थे। इब कई दिनां पाच्छै डाकदर वें टांके काटण फत्तू कै घरां चल्या गया। तो फत्तू बोल्या- डाकदर साब जिस दिन थामनै टांके लाए थे उस दिन भी छोरा घणा रोया था अर आज बेरा नी के-के करैगा। तो डाकदर साब बोल्या- तों चिंता ना करै फत्तू मैं इसनै बेरा भी कोनी लागण दयूं। तो डाकदर साब टांके काटदे ओए छोरा तै बोल्या- वो देख बेटा आसमान मैं चिडिय़ा। तो छोरा पड़दाए बोल्या- तू पैर कानी देख ले मामा, पैर काटैगा के।
पढण आया करूं...
इतिहास के मास्टर जी नै टुग्गी राम तै पूछया- टुग्गी बता अकबर का जन्म कद ओया था। टुग्गी कोणसा घैट था- पड़दाए बोल्या, जी मैं स्कूल मै पढण आया करूं 'जाप्पा' काडण कोनी आया करदा।
भीत्तर दरी बिछा राखी सै...
ताऊ छज्जू शहर जावै था तो बस मैं घणी भीड़ थी तो ताऊ झांकी मैं लटक ग्या। तो एक छोरा उसतै बोल्या- ताऊ झांकी मैं क्यांतै खडया सै, भीत्तर नै आज्या। तो ताऊ पड़दाए बोल्या- क्यूं भीत्तर दरी बिछा राक्खी सै।
कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें