यामी गौतम की बढिय़ा एक्टिंग संग जोरदार मैसेज 'ए थर्सडे'

'ए थर्सडे' मुंबई की एक प्ले स्कूल टीचर नैना जायसवाल (यामी गौतम) की कहानी है। नैना एक दिन अचानक से प्ले स्कूल के सभी बच्चों को होस्टेज बना लेती हैं, इसके बाद पुलिस को कॉल करके धीरे धीरे अपनी डिमांड रखना शुरू करती हैं। नैना पुलिस से कहती हैं कि उन्हें पांच करोड़ रुपये चाहिए और साथ ही देश की प्रधानमंत्री (डिंपल कपाडिय़ा) से बैठकर आमने सामने बात करनी हैं। पुलिस के किरदार में इस केस को कैथरीन (नेहा धूपिया) और जावेद खान (अतुल कुलकर्णी)  देखते हैं। जावेद और कैथरीन की इक्वेशन इस केस को सुलझाने के लिए अलग अलग होती है। आखिर क्यों नैना ने बच्चों को किडनैप किया, इसके लिए फिल्म देखनी होगी।

नैना के किरदार में यामी गौतम ने बढिय़ा एक्टिंग की है। एक ही सीन में जैसे बच्चों को मुस्कुराते हुए यामी ने दिल खुश किया तो वहीं पलक झपकते ही सीन के साथ बदलते उनके तेवर भी जचे हैं। प्ले स्कूल टीचर से लेकर बच्चों को होस्टेज रखने तक यामी के अलग अलग शेड्स अच्छे लगे हैं। यामी के अलावा अतुल कुलकर्णी और डिंपल कपाडिय़ा का भी काम अच्छा रहा है हालांकि नेहा धूपिया अपने किरदार में काफी फीकी लगी हैं। पूरी फिल्म तो अच्छी है लेकिन कई हिस्सों पर स्क्रिप्टिंग और बेहजाद खंबाटा का निर्देशन काफी हल्का है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी बढिय़ा हो सकती थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 

फिल्म में समाज से जुड़े एक बहुत की अहम मुद्दे रेप को दिखाया गया है। रेप हमारे समाज की एक बहुत समस्या है, रेप से जुड़े कुछ आंकड़ों को भी फिल्म में दिखाया गया है, जो सच में हैरान और परेशान करने वाले हैं। फिल्म में रेप के मुद्दे के अलावा मीडिया की वर्किंग पर भी तंज कसा गया है। कई बार टीआरपी की होड़ में और ब्रेकिंग के चक्कर में मीडिया हद से आगे हो जाती हैए जिसका एक छोटा सा उदाहरण आपको देखने मिलेगा। फिल्म में जैसे कमांडो की एक्टिविटी को लाइव दिखाना हो या फिर नैना की मेंटल डिटेल्स को लीक करना। वहीं जिस तरह से नैना की जानकारी जुटाने और परिवार का बैकग्राउंड निकालने में लंबा वक्त दिखाया गया है, वो आज ट्विटर. फेसबुक के टाइम में पुराना दिखता है। फिल्म का एक और सीन गौर करने वाला है, जहां पीएम की इजाजत के बिना ही उनकी टीम एक बड़ा फैसला लेती है, क्या सच में ऐसा होता है?

देखें या नहीं, 'ए थर्सडे' की कई लोग 'ए वेडनेसडे'  से तुलना कर रहे हैं। करीब. करीब दोनों ही फिल्मों की थीम एक जैसी है, जहां एक इंसान समाज से जुड़ी एक समस्या को लेकर पूरे देश को हिला देते हैं। 'ए वेडनेसडे'  नीरज पांडे की एक कल्ट क्लासिक फिल्म हैए जिसकी तुलना में 'ए थर्सडे' मजोर साबित होती हैए लेकिन इस फिल्म का भी अपना ही अलग चार्म है। ऐसे में इस फिल्म को जरूर देखना चाहिएए वहीं इस फिल्म को आप अपने परिवार के साथ भी देख सकते हैं।

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