फख्र: प्रदेश की बेटी यूक्रेन में निभा रही जिम्मेदारी

 फख्र: प्रदेश की बेटी यूक्रेन में निभा रही जिम्मेदारी 

जन संदेश न्यूज नेटवर्क

चरखी दादरी: यूक्रेन में जो हालात हैं ऐसे में वहां रहना बेहद मुश्किल है। इन हालातों के बावजूद भी कोई भारतीय वहां से लौटने से इंकार कर दे तो जरूर इसके पीछे कोई न कोई बड़ा कारण ही हो सकता है। 

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। यूक्रेन से आने वाली हर तस्वीर दिल को दहला देती है। यूक्रेन में जो भी लोग भी हैं उन्हें कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। हमारे देश भारत के भी हजारों लोग यूक्रेन में फंसे हुए हैं जिन्हें वहां से सुरक्षित वापस लाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। यूक्रेन से भारतीय छात्र लगातार सोशल मीडिया के जरिए वापस भारत लौटने की गुहार लगा रहे हैं। वहां की भयानक मंजर को देखने के बाद सभी वापस अपने मुल्क लौटना चाहते हैं। जो लोग/छात्र भारत लौट रहे हैं, वह लगातार भगवान के साथ-साथ सरकार का भी धन्यवाद कर रहे हैं। इन सबके बीच चरखी दादरी की एक विद्यार्थी ने अपने वतन भारत लौटने से इनकार कर दिया है। 

दादरी की यह छात्रा यक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है लेकिन उन्होंने एक बहुत ही बड़ा फैसला लिया है जो किसी को भी हैरान कर सकता है। एक समाचार पत्र के मुताबिक, दरअसल, इस छात्रा का नाम नेहा है जिनकी उम्र करीब 17 वर्ष की है और यूक्रेन में पेइंग गेस्ट में रह रही हैं। इस विद्यार्थी का मालिक रूस-यूक्रेन युद्ध में स्वेच्छा से यूक्रेनी सेना में अपनी सेवा देने के लिए शामिल हो गया है और इन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारी नेहा को सौंप दी है। इसलिए नेहा ने अपने मालिक के घर को सुरक्षित रखने के लिए भारत लौटने से इनकार कर दिया है। 

दरअसल, नेहा जिस पेन गेस्ट में रहती है उसके मालिक के तीन बच्चे और उनकी पत्नी हैं। नेहा ने उनका ख्याल रखने के लिए भारत लौटने से इनकार कर दिया है। नेहा ने अपनी मां से कहा है कि मैं रहूं या ना रहूं लेकिन मैं इन बच्चों और उनकी मां को इन रूखे हालातों में छोड़कर अपने वतन नहीं आ सकती। नेहा के पिता भी आर्मी में थे। नेहा ने पिछले साल ही मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया है।

हर भारतवासी नेहा के इस जज्बे को सलाम करता है कि वह हजारों किलोमीटर दूर तीन बच्चों और उनकी मां के कुशलमंगल और स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। कहते भी हैं कि 'है काम आदमी का औरों के काम आनाÓ, नेहा ने इसे चरितार्थ भी कर दिया है। छोरे तो छोरे, म्हारी तो बेटियों भी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं फेरती। हमें फक्र है हमारी ऐसी सब बेटियों पर। 

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