‘अधिक पानी चाहिए तो पहले पंजाब से हरियाणा का हिस्सा छोडऩे को कहें’

 जन संदेश न्यूज नेटवर्क


प्रदेश जल बंटवारा का पूरी तरह से पालन कर रहा है 

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर जल बंटवारे के मुद्दे को लेकर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया है। सीएम ने कहा कि अगर दिल्ली को और अधिक पानी चाहिए तो पहले पंजाब को हरियाणा के हिस्से का पानी छोडऩे के लिए कहना चाहिए। पंजाब में इस साल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में ‘आप’ की सरकार बनी है।
कुछ दिनों पहले दिल्ली सरकार ने हरियाणा को एक एसओएस (आपातकालीन) कॉल भेजा था जिसमें राजधानी में जल संकट से निपटने के लिए यमुना नदी में अतिरिक्त पानी छोडऩे का आग्रह किया गया था।
उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, हरियाणा दिल्ली के साथ जल बंटवारा समझौते का पूरी तरह से पालन कर रहा है और हर दिन यमुना का 1,049 क्यूसेक से अधिक पानी दिल्ली के लिए छोड़ता है। उन्होंने कहा कि हम हरियाणा को उसके हिस्से के पानी से वंचित नहीं कर सकते और दिल्ली को उसके वैध हिस्से से ज्यादा पानी नहीं दे सकते।
सीएम खट्टर ने कहा कि पानी के मुद्दे पर ओछी राजनीति करने के बजाय, दिल्ली सरकार को पंजाब सरकार को जल्द से जल्द हरियाणा के वैध हिस्से का पानी जारी करने के लिए मनाना चाहिए। मैं वादा करता हूं कि जिस दिन पंजाब हमारा हिस्सा देगा, हरियाणा उसी दिन दिल्ली के मौजूदा पानी के हिस्से को बढ़ा देगा।  
उन्होंने कहा कि हरियाणा में खुद पानी की किल्लत है लेकिन इसके बावजूद दिल्ली को उसके हिस्से का पूरा पानी दिया जा रहा है। जब भी दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है तो यह साबित हुआ है कि हरियाणा के मूनक हेडवक्र्स से दिल्ली को उसके हिस्से के 719 क्यूसेक के मुकाबले 1049 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ रहा है लेकिन दिल्ली सरकार गलत बयानबाजी कर ओछी राजनीति कर रही हैए जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
दिल्ली सरकार को यह समझना चाहिए कि उनकी पेयजल की आवश्यकता को पूरा करना अकेले हरियाणा की जिम्मेदारी नहीं है। वह भी जल प्रबंधन योजनाएं बनाने की दिशा में कार्य कर सकती है। गत कुछ दिनों में प्रदेश में 1800 मेगावाट तक बिजली की कमी चल रही थी। वर्तमान समय में बिजली की मांग गत वर्ष की तुलना में 700 से 800 लाख यूनिट अधिक है। इस समय राज्य की अधिकतम मांग 9874 मेगावाट तक पहुंच गई हैए जबकि बिजली की आपूर्ति भी 9874 मेगावाट है। गत 16 मई से खपत के बराबर बिजली आपूर्ति करने में सफल रहे हैं। अडाणी की यूनिटों से भी 600 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है तथा वहां से और भी बिजली मिलने की सम्भावना है। आगामी 30 मई तक खेदड़ यूनिट-2 से अतिरिक्त 600 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो जाने की सम्भावना है। इसी तरह 26 मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा मिलने लगी है और 15 जून तक 127 मेगावाट सौर ऊर्जा और भी उपलब्ध हो जाएगी। धान रोपाई के लिए बिजली की जरूरत पूरी करने के जम्मू-कश्मीर से 300 मेगावाट बिजली का प्रबंध किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की राज्य से बाहर भी बिजली संयंत्र स्थापित करने की योजना है। बिजली बचत पर भी जोर दिया जा रहा है। उजाला योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को अब तक कुल 1.56 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं। इससे प्रति वर्ष 2027 मिलियन यूनिट की बचत हुई है और पीक डिमांड में 406 मेगावाट की कमी आई है। इस योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को अब तक कुल 2,13,302 एलईडी ट्यूबलाइट वितरित की जा चुकी हैं। इससे प्रति वर्ष 9.34 मिलियन यूनिट ऊर्जा की बचत हुई है और उजाला पोर्टल डैशबोर्ड के अनुसार, पीक डिमांड में चार मेगावाट की कमी आई है। इसके अलावा, उजाला योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को कुल 60,709 ऊर्जा कुशल पंखे वितरित किए गए हैं। इससे प्रति वर्ष 5.65 मिलियन यूनिट ऊर्जा की बचत हुई है और पीक डिमांड में 2 मेगावाट की कमी आई है।

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