बहुत खतरनाक हैं खूबसूरती निखारने के ये तरीके

स्वास्थ्य—जन संदेश न्यूज् नेटवर्क

बढ़ती उम्र को कैसे रोकें, चेहरे पर बढ़ रही झुरियों का क्या करें? त्वचा पर कसाव कैसे लायें या मनचाहा ग्लो किस तरह से पाया जाये। हर किसी के मन में इस तरह के सवाल आना लाजिमी है। ऐसे में सभी लोग कॉस्मेटोलॉजी या बोटोक्स ट्रीटमेंट का रुख करते हैं। उम्र को कम दर्शाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक बोटॉक्स ही है। लेकिन अब इस तकनीक पर भी कुछ सवाल उठने लगे हैं। एक नए शोध में यह दावा किया गया है कि बोटोक्स में इस्तेमाल की जाने वाली ड्रग शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकती है।

दुनियाभर में महिला-पुरुषों द्वारा जवां दिखाने के लिए अपनाई जा रही बोटॉक्स तकनीक को लेकर पिछले कुछ सालों से विवाद उठते रहे हैं। मगर अब इस बात के ठोस प्रमाण मिले हैं कि किसी विशेष हिस्से को पैरेलाइज करने वाले इस ड्रग के गुण इंजेक्शन वाली जगह से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकते हैं। हैरत की बात यह है कि 2002 में सबसे पहले अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इसे यह कहकर मान्यता दी थी कि यह अपनी जगह से आगे नहीं बढ़ता है। हालांकि सात साल बाद एफडीए ने ही चेतावनी जारी की कि यह उन कोशिकाओं पर भी असर कर सकता है जिन्हें टारगेट नहीं किया गया है। वहीं अब तो अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन मेडिसन ने इस थ्योरी को सही साबित कर दिया है। फिलहाल चूहे की कोशिकाओं पर हुए रिसर्च से आशंका जताई जा रही है कि बोटॉक्स के जहरीले तत्व सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर भी असर डाल सकते हैं।

ये है तकनीक: बोटॉक्स दरअसल बोटुलिनम टॉक्सिन के लिए बोलचाल में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। यह न्यूरोटॉक्सि क प्रोटीन है जो बैक्टि रीयम क्लोस्ट् रिडियम बोटुलिनम नाम के जीवाणु से उत्पन्न होता है। जब इस ड्रग का बेहद डाइल्युटेड डोज त्वचा या शरीर के किसी हिस्से में इंजेक्ट किया जाता है तो ये वहां की नव्र्स के केमिकल सिग्नल को कमजोर कर देता है। यानी उस निश्चित हिस्से की कोशिकाएं पैरेलाइज्ड हो जाती हैं और उनका सिकुडऩा रोका जा सकता है। नतीजतन त्वचा में खिंचाव आता है और झुर्रियां कम हो जाती है। बोटॉक्स इंजेक्शनों को महीन नीडल से लगाया जाता है जिसमें बहुत मामूली दर्द होता है। इस कॉस्मेटिक प्रक्रिया के लिए किसी एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती।

मेडिकल यूज भी: बोटॉक्स का कॉमेस्टोलॉजी के साथ मेडिकल यूज भी होता है। हथेलियों या बगल में अधिक पसीना आने की समस्या है तो बोटॉक्स ट्रीटमेंट से इसे दूर किया जाता है। कई ऑर्थोपेडिक सर्जन भी सेरेब्रल स्पास्टिसिटी से पीडि़त बच्चों के इलाज में बोटॉक्स का उपयोग करते हैं। विदेशों में डेंटिस्ट भी मरीज के चेहरे पर अच्छी मुस्कान लाने के लिए बोटॉक्स यूज करते हैं। चेहरे की मसल्स संबंधी बीमारी में भी बोटॉक्स ट्रीटमेंट दिया जाता है। इससे मरीजों को फायदा पहुंचता है।

ये हैं फायदे: एक बार बोटॉक्स लेने के बाद छह महीने तक आपके चेहरे पर कसावट और ग्लो बना रहता है। उसके बाद फिर से ट्रीटमेंट लेने में कोई नुकसान नहीं है। किसी पेशेंट को दो वर्ष तक लगातार बोटॉक्स देने से उसकी मसल्स रिलेक्स हो जाती हैं। इसका फायदा यह है कि इन दो सालों के दौरान आने वाले नए रिंकल्स पर रोक लग जाती है। कई फिल्मी हस्तियां भी बोटॉक्स के जरिए ही अपने चेहरे पर ग्लो बनाए हुए हैं ।

ये हैं साइड इफेक्ट्स: इसके साइड इफेक्ट त्वचा की प्रकृति अनुरूप होते हैं। इनमें फ्लू सिंड्रोम, रेस्पाइरेटरी इंफेक्शन, माथे पर एलर्जी या सिर दर्द हैं। इसके अलावा जिस स्थान पर इंजेक्शन दिए जाते हैं वहां पर मामूली दर्द और लालपन आ  सकता है। वहां सूजन, खुजली या कभी-कभी खून का धक्का जम सकता है। ये सभी साइड इफेक्ट जो आमतौर पर सात दिन या उससे कम समय में खत्म हो जाते हैं।

इस बात का रखें ध्यान: विशेषज्ञ बताते हैं कि बोटॉक्स ट्रीटमेंट में काफी ग्लैमर है। ऐसे में इस फील्ड में कई लोग उतर रहे हैं। कई ब्यूटी पार्लर वाले भी अनुभवहीन लोगों से बोटॉक्स ट्रीटमेंट दिलवा रहे हैं। जो आपकी सेहत के लिए महंगा सौदा हो सकता है। ट्रीटमेंट एक्सपर्ट से कराया जाए और यूनिट्स का ध्यान रखा जाए तो साइड इफेक्ट्स खत्म हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय: इसके इस्तेमाल पर डर्मेटोलॉजिस्ट और अन्य फिजिशियन के मत अलग-अलग हैं। जहां डर्मेटोलॉजिस्ट इस तकनीक के पक्ष में होकर इसे लगातार करते रहने की सलाह देते हैं वहीं जनरल फिजिशियन और होम्योपैथी के डॉक्टरों के अनुसार उनके पास आने वाले मरीजों में से 60 फीसदी वे होते हैं जो किसी तरह का स्किन ट्रीटमेंट करवाकर अपनी त्वचा खराब कर चुके होते हैं। होम्योपैथी के विशेषज्ञ बताते हैं कि स्किन की लेयर्स से छेड़छाड़ उस परत को खत्म कर देती है। स्किन पर बोटॉक्स या अन्य ट्रीटमेंट करवाने से काफी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसका लंबा इलाज करवाना पड़ सकता है। बोटॉक्स के एक सेशन की कॉस्ट भारत में 6000 रुपये है।

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