जन संदेश न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली: नायडू ने 1960 के दशक के अंत में एक जनसभा में जनसंघ के तत्कालीन नेता अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण सुनने के बाद एबीवीपी के साथ अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। उपराष्ट्रति एम वेंकैया नायडू अपनी युवावस्था से ही प्रभावशाली वक्ता के तौर पर जाने जाते हैं। हालांकि बताया जाता है कि वह 14 साल की उम्र में महज ‘कबड्डी’ खेलने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ‘शाखा’ में शामिल हुए थे। नायडू ने अपने सार्वजनिक जीवन में लंबा सफर तय किया है।
नायडू पार्टी के लिए पोस्टर चस्पाने का कार्य किया और पार्टी के राजनीतिक और वैचारिक निष्ठा के प्रतीक बने। वह भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार हुए और बाद में देश के उपराष्ट्रपति बने। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के जरिए छात्र राजनीति में शामिल हुए और जेपी (जयप्रकाश) आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
नहीं मिला दूसरा कार्यकाल
नायडू शनिवार को देश के उन उपराष्ट्रपतियों की उस सूची में शामिल हो गए जिन्हें दूसरा कार्यकाल प्राप्त नहीं हुआ। अब तक सर्वपल्ली राधाकृष्णन और हामिद अंसारी ही ऐसे दो उप राष्ट्रपति रहे हैं जो इस पद पर लगातार दो कार्यकाल तक काबिज रहे।
नायडू का जन्म आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। नायडू (72) भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने एक केंद्रीय मंत्री के रूप में और लंबे समय तक राज्यसभा सदस्य के तौर पर सेवा दी। हालांकि वह कभी लोकसभा सदस्य नहीं रहें। नायडू आंध्र प्रदेश विधानसभा के दो बार सदस्य रहे हैं। उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1978 में एकीकृत आंध्र प्रदेश में जीता था।
वाकपटुता के लिए जाना जाता है
उन्हें उनकी वाकपटुता के लिए जाना जाता है। वह अक्सर अपनी बात को रोचक तरीके से एक वाक्य और मुहावरों में कहने के लिए जाने जाते हैं। कई लोगों को यह नहीं पता होगा कि वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दक्षिण भारत में दिए जाने वाले भाषणों का अनुवाद किया करते थे। मांसाहारी व्यंजनों के शैकीन नायडू हमेशा सशंकित रहे थे कि उन्हें भगवा खेमे में स्वीकार किया जाएगा या नहीं।

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