मात्र 5 रुपये की उधारी लेकर किशोर दा ने बनाया था पहला गीत

1975 में आपातकाल के दौरान एक सरकारी समारोह में भाग लेने से किशोर दा के मना कर देने पर तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने किशोर के गीतों के आकाशवाणी से प्रसारित किए जाने पर रोक लगा दी थी, उन के घर पर आयकर के छापे भी डलवाए गए थे फिर भी उन्होंने आपात काल का समर्थन नहीं किया था


रूपहले पर्दे पर चमकने वाले सितारों की बात करें तो इनमें किशोर कुमार की पहचान सबसे चमकदार सितारे के तौर पर होती है। शानदार अभिनेता, सुरीले गायक, उम्दा निर्माता निर्देशक, कुशल पटकथा लेखक और बेहतरीन संगीतकार के तौर पर किशोर को एक संपूर्ण कलाकार कहा जा सकता है। हर तरह के गीतों, चाहे वह दर्द भरे गीत हों या रूमानियत से भरे प्रेमगीत, हुल्लड़ वाले जोशीले नगमे हों या संजीदा गाने उनकी आवाज ने बहुत से गीतों को यादगार बना दिया। इसके अलावा वे अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए भी जाने जाते हैं उन्होंने अपने इस हुनर से 50-60 के दशक में दर्शकों को खूब हंसाया। 4 अगस्त 1929 को आभास कुमार गांगुली के नाम से जन्मे किशोर का नाम सुनते ही एक कंफ्यूजन दिमाग में दौड़ती है कि उन्हें किस रूप में याद किया जाए। उन्होंने हिंदी के अलावा और भी बहुत सी भाषाओं में गीत गाए। उनके अभिनय और निर्देशन को भी लाजवाब माना जाता है। हास्य अभिनय में किशोर कुमार अपने आप में अनूठे और बेजोड़ थे। इस महान कलाकार ने 13 अक्टूबर 1987 को इस दुनिया को अलविदा कहा।

एक बार नागरिक शास्त्र के पीरियड में किशोर अपनी कक्षा में टेबल को तबले की तरह बजा रहे थे। प्रोफेसर ने उन्हें फटकार लगाते हुए हिदायत दी कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें क्योंकि गाना-बजाना उन्हें जिंदगी में बिल्कुल काम नहीं आएगा। इस पर किशोर ने अपने अध्यापक को मुस्कुराते हुए जवाब दिया था कि इसी गाने-बजाने से उनके जीवन का गुजारा होगा।

किशोर कुमार वर्ष 1948 में पढ़ाई अधूरी छोडक़र इंदौर से मुंबई चले गए थे। लेकिन क्रिश्चियन कॉलेज के कैंटीन वाले के उन पर पांच रुपए और 12 आने (उस समय प्रचलित मुद्रा) उधार रह गए थे। माना जाता है कि यह बात किशोर कुमार को याद रह गई थी और उधारी की इसी रकम से प्रेरित होकर फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ (1958) के मशहूर गीत ‘पांच रुपैया बारह आना’ का मुखड़ा लिखा गया था। इस गीत को खुद किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने आवाज दी थी। 

आपातकाल में बंद किए गए गाने

1975 में देश में आपातकाल के समय एक सरकारी समारोह में भाग लेने से साफ मना कर देने पर तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने किशोर कुमार के गीतों के आकाशवाणी से प्रसारित किए जाने पर पर रोक लगा दी थी और किशोर कुमार के घर पर आयकर के छापे भी डाले गए। मगर किशोर कुमार ने आपात काल का समर्थन नहीं किया। यह दुर्भाग्य और शर्म की बात है कि किशोर कुमार द्वारा बनाई गई कई फिल्में आयकर विभाग ने जप्त कर रखी है और लावारिस स्थिति में वहाँ अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रही है।

संघर्ष करके बनाई पहचान

किशोर कुमार ने भारतीय सिनेमा के उस स्वर्ण काल में संघर्ष शुरू किया था जब उनके भाई अशोक कुमार एक सफल सितारे के रूप में स्थापित हो चुके थे। दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, बलराज साहनी, गुरुदत्त और रहमान जैसे कलाकारों के साथ ही पाश्र्वगायन में मोहम्मद रफी, मुकेश, तलत महमूद और मन्ना डे जैसे दिग्गज गायकों का बोलबाला था।

13 अक्टूबर, 1987 को उन्होंने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। किशोर कुमार और सबके दिलों को छू जाने वाले उनके गीतों को भुलाया जाना मुमकिन नहीं है। वे सदा गीत प्रेमियों के दिलों पर राज करते रहेंगे।

किशोर कुमार को भारत रत्न तथा उनके घर को विरासत स्थल घोषित करने की मांग ने पकड़ा जोर

बॉलीवुड के दिवंगत पाश्र्व गायक किशोर कुमार की स्मृति में बनाए गए उनके प्रशंसकों के समूह ने मांग कि है कि उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाए और मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित उनके पुश्तैनी घर को ‘विरासत स्थल’ घोषित किया जाए। किशोर कुमार का जन्म चार अगस्त 1929 को खंडवा में हुआ था और मुंबई में उनकी मृत्यु के बाद 13 अक्टूबर 1987 को यहां खंडवा में उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

यहां उनके स्मारक पर आने वाले बड़ी संख्या में उनके प्रशंसकों को गायक-अभिनेता का पसंदीदा नाश्ता दूध-जलेबी का प्रसाद दिया जाता है। किशोर प्रेरणा मंच के अध्यक्ष रणवीर सिंह चावला के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को दो हजार से अधिक पोस्टकार्ड भेजे गए हैं जिनमें किशोर कुमार के घर को ‘विरासत स्थल’ घोषित करने और उन्हें भारत रत्न देने की मांग की गई है। सिंह के अनुसार, किशोर कुमार हमेशा कहते थे कि दूध-जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जायेंगे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यहां उनके पुश्तैनी मकान की हालत खस्ता है। दुनिया भर के उनके प्रशंसक चाहते हैं कि इसे विरासत स्थल घोषित किया जाए।

देवा किशोर के नेतृत्व में लखनऊ स्थित किशोर कुमार अखिल भारतीय समूह के साथ-साथ अहमदाबाद के पराग मेहता भी यही मांग करते हैं जबकि मुरादाबाद के तारिक किशोर और पटियाला के राकेश कोटिया जैसे प्रशंसक भी जागरूकता पैदा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान किशोर कुमार की जयंती पर खंडवा का दौरा करने का वादा किया था लेकिन वह नहीं आ सके। प्रेरणा मंच के प्रवक्ता सुनील जैन के अनुसार, इस अवसर पर गौरव यात्रा भी निकाली जा रही है जिसमें लोक कलाकार पारंपरिक गीतों पर नृत्य करेंगे। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और दादा धूनीवाले के रथ की झांकी यात्रा के प्रमुख आकर्षण है।

कार्यक्रम में गायक पामेला जैन और अमय दाते किशोर के गीत पेश करेंगे। खंडवा जिला कलेक्टर अनूप सिंह ने कहा कि कुमार के जन्म दिन को मनाने के लिए छह अगस्त तक तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसमें जुंबा नृत्य, मानव श्रृंखला, व्यंजन उत्सव आदि और अंतिम दिन निमाड़ी हिंदी कवि सम्मेलन किया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अपने प्रिय गायक को श्रद्धांजलि के तौर पर लोगों को अपने घरों के सामने रंगोली बनानी चाहिए।

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