सीएम ने खेल मंत्री को अपने दूसरे विभाग का काम देखने को कहा

जन संदेश न्यूज नेटवर्क

चंडीगढ़: यौन उत्पीडऩ के आरोप का सामना कर रहे प्रदेश के मंत्री संदीप सिंह के संबंध में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि केवल आरोप लगाए जाने या प्राथमिकी दर्ज किए जाने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता है। उन्होंने कहा कि सिंह अब भी मंत्री हैं जो प्रिंटिंग और स्टेशनरी विभाग का प्रभार संभाल रहे हैं। सिंह ने राज्य के खेल विभाग की एक महिला कोच द्वारा कथित रूप से यौन उत्पीडऩ के आरोप में मामला दर्ज कराए जाने के बाद पिछले सप्ताह खेल विभाग छोड़ दिया था और कहा था कि उन्होंने नैतिक आधार पर यह कदम उठाया है तथा दावा किया कि उनके खिलाफ आरोप निराधार हैं।

यहां संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री से सिंह से जुड़े मामले पर टिप्पणी के लिए पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह अब भी मंत्री हैं और उनके पास प्रिंटिंग और स्टेशनरी विभाग का प्रभार है। मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने सिंह से बात नहीं कीए बल्कि उन्हें संदेश दिया कि वह अपने मौजूदा विभाग का काम देखें। सरकार संदीप सिंह को बचा रही है, विपक्षी दलों के इस आरोप पर सीएम ने कहा कि देखिए अगर कोई बयान देने को संरक्षण माना जाता है तो  मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता। मैंने पहले एक बयान दिया था और मैं दोहरा रहा हूं कि आरोप लगाए जाने और उस आधार पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने से ही कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं हो जाता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को दोषी साबित करने की एक प्रणाली है जिसमें जांच भी शामिल है। पुलिस जांच कर रही है। उन्होंने शिकायतकर्ता और सिंह को भी तलब किया था। दोनों से चंडीगढ़ पुलिस ने लंबी पूछताछ की है। दोनों ने अपने संस्करण सामने रखे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इन जांच के बाद कोई नया तथ्य सामने आता है तो वे उनसे दोबारा पूछताछ करेंगे। अगर कोई नया तथ्य सामने नहीं आता है तो वे अपना विश्लेषण सार्वजनिक करेंगे या आरोप-पत्र अथवा अदालत के सामने मामला पेश करेंगे। यही प्रक्रिया है।

पुरुष राष्ट्रीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपिक खिलाड़ी संदीप सिंह को अपने खिलाफ यौन उत्पीडऩ मामले की पुलिस जांच में शामिल हुए थे और उन्होंने महिला एथलेटिक्स कोच द्वारा लगाए गए आरोपों को ‘झूठा और निराधार’ करार दिया। यहां सेक्टर 26 थाने में उनसे करीब सात घंटे तक पूछताछ की गई। पहली बार विधायक बने सिंह पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (महिला का शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354 ए (यौन उत्पीडऩ), 354 बी (नग्न होने के लिए मजबूर करना) और 342 (बंधक बनाकर रखना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बाद में प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 509 (शब्द, हावभाव या ऐसा कृत्य जिससे किसी महिला की गरिमा भंग होती है) को भी शामिल किया।

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