‘महिला कोच उत्पीडऩ: सीएम जांच को कर रहे प्रभावित’

जन संदेश न्यूज नेटवर्क

चंडीगढ़: प्रदेश कैबिनेट के मंत्री संदीप सिंह पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाने वाली महिला कोच ने दावा किया है कि राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और उन पर चुप रहने के लिए दबाव डाला जा रहा है। जूनियर एथलेटिक्स कोच ने संदीप सिंह (36) पर गलत तरीके से छूने और उनके कपड़े फाडऩे का आरोप लगाया है। चंडीगढ़ पुलिस ने भाजपा नेता के खिलाफ यौन उत्पीडऩ और गलत तरीके से बंधक बनाकर रखने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।

पूर्व ओलंपियन और कुरुक्षेत्र के पिहोवा से पहली बार विधायक बने संदीप भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे हैं और आरोप लगने से पहले तक राज्य का खेल व प्रिंटिंग और स्टेशनरी विभाग संभाल रहे थे। हालांकि बीते रविवार को उन्होंने खेल विभाग यह कहते हुए छोड़ दिया था कि उन्होंने नैतिक आधार पर यह कदम उठाया है और दावा किया कि उनके खिलाफ आरोप निराधार हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सामने पेश होने के बाद इसी दिन को शाम पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने एसआईटी को सब कुछ विस्तार से बताया दिया है। उनके जो लंबित मुद्दे थे, उन्होंने वो भी एसआईटी के सामने उठाए हैं। महिला कोच के बयान करीब आठ घंटे तक दर्ज किए गए। मीडियाकर्मी के यह पूछने पर कि संदीप सिंह को समन नहीं किया गया उन्होंने बताया कि उन्होंने यह बात उठाई है।

एक वीडियो के मुताबिक महिला ने आगे कहा कि जब तक वो इस्तीफा नहीं देंगे, यह दिक्कत तो रहेगी और दूसरी बात यह है कि हमारे माननीय सीएम सर हैं, वो कहीं न कहीं पूरी जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने उनका एक इंटरव्यू देखा जिसमें वो सीधा-सीधा पक्ष ले रहे हैं। तो जाहिर है कि जांच प्रभावित तो ही रही है न। खुलके सामने आ ही गया है सब कुछ। उनका इशारा मुख्यमंत्री के उस बयान की तरफ था, जहां उन्होंने कहा था कि कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए दोषी नहीं हो जाता कि उसके खिलाफ आरोप लगा है।

पिछले दिनों एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि एक महिला खिलाड़ी ने खेल मंत्री के खिलाफ बेतुका आरोप लगाया है। लेकिन सिर्फ आरोप लगाने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता है। पुलिस आरोपों की जांच भी करती है (उनकी पुष्टि करने के लिए)।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह पूछने पर कि क्या किसी तरह का दबाव बनाया जा रहा है क्योंकि महिला ने कहा कि उन्हें किसी का फोन आ रहा है, इस पर कोच ने कहा कि उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए पैसे की पेशकश की जा रही है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि कितना पैसा आप लेना चाहती हैं, अपनी शिकायत वापस न लें लेकिन अपना मुंह बंद रखें और 15 दिन या एक महीने के लिए देश से बाहर चली जाएं। एक महीने के बाद आपको अपना मुंह बंद रखने के लिए एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे और बाद में आपको जितना पैसा चाहिए उतना दिया जाएगादृ मुझे इस तरह के फोन आ रहे हैं।

कॉल करने वाले की पहचान के बारे में पूछे जाने पर उनके साथ मौजूद उनके वकील दीपांशु बंसल ने कहा कि सभी विवरण एसआईटी के साथ साझा किए गए हैं। वकील के अनुसार, कोच के पास जो भी रिकॉर्ड उपलब्ध था, वह पुलिस को दे दिया गया है और जांच के तहत उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है। महिला कोच का यह भी कहना था कि हरियाण पुलिस द्वारा भी उन पर दबाव बनाया गया। हालांकि उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस द्वारा कोई दबाव डाले जाने से इनकार किया।

उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों के साथ ही राज्य की खाप और सामाजिक संगठनों ने भी संदीप सिंह के इस्तीफे की मांग की है। राज्य की  ‘12 धनखड़ खाप’ की एक पंचायत में राज्य सरकार से कोच के लिए जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करने और मंत्री को बर्खास्त करने का आग्रह किया गया है। साथ ही कहा गया कि अगर सरकार ऐसा करने में विफल रहती है तो खाप एक ‘बड़ा आंदोलन’ शुरू करेगी।

पुलिस महानिदेशक ने सिंह द्वारा कोच के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद एक समिति का गठन किया। सिंह ने कोच के खिलाफ शिकायत में दावा किया कि उसने उनकी छवि खराब की है। एक महिला संगठन ने यह भी मांग की थी कि प्रदेश सरकार को मंत्री के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ की उपाध्यक्ष जगमती सांगवान के अनुसार, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीडऩ अधिनियम 2013’ या ‘पीओएसएच’ अधिनियम के तहत दिशानिर्देश स्पष्ट हैं, आरोपी के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और आपराधिक कार्यवाही की जानी चाहिए। साभार मीडिया

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