उनकी समस्या का क्या समाधान होना चाहिए, इस पर आप भी अपने सुझाव दे सकते हैं ताकि उनको अपनी समस्या का सर्वोत्तम हल मिल सके। अपने आत्म सम्मान की रक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने में हिचकना नहीं चाहिए। कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाओं में उन लोगों के नाम नहीं बताये जिसने उन्हें ठेस पहुँचाई लेकिन वह सम्मान को ठेस पहुँचाए जाने पर चुप नहीं रहे। आपसे भी आग्रह है कि गलत व्यवहार के खिलाफ बोलें क्योंकि जिन समस्याओं को लेकर हम चुप हो जाते हैं वह बाद में अत्याचार का रूप ले लेता है।
1. आमतौर पर यह देखा गया है कि अगर कोई लडक़ी किसी भी लडक़े या आदमी से हंस कर बात कर लेती है तो इसका मतलब यह हो गया कि वह लडक़ा उस लडक़ी को जैसे चाहे मैसेज करने लग जाए या उसको लेकर कुछ भी बोलने लग जाए या यहां तक कि उसके चरित्र पर ऊँगली उठाने लग जाए। अगर सरल भाषा में बोला जाये तो हंसी तो फंसी।
समाधान: अगर लडक़ी गलत नहीं है तो उसको उसी समय उस इंसान को टोक देना चाहिए और बात अगर ऑफिस की है तो उसे अपने सीनियर से बताना चाहिए और अगर सीनियर भी इन सबको हलके में लेता है तो उस व्यक्ति द्वारा किये गए मैसेज को अपने ई-मेल पर और अपने मैसेज बॉक्स में सुरक्षित करके रखें और अगर ऐसी कोई कॉल भी आती है तो उसकी भी रिकॉर्डिंग कर ले और नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर इस बात की रिपोर्ट लिखवाये। आप गलत नहीं हैं तो गलत को बढ़ावा भी मत देने दें। आज आपके साथ यह हरकत हुई है कल किसी और के साथ भी ऐसा कुछ हो सकता है।
2. दूसरी समस्या है गलत हरकत बर्दाश्त करना। यह भी समस्या आम है उन लड़कियों के साथ खासकर ऐसी जो माध्यम वर्ग से हैं और कुछ हद तक उनके घर का खर्च उनकी तनख्वाह पर ही निर्भर करता है। ऐसी ही एक समस्या हमारे पास भी आई है जिसमें उसका सीनियर उसके साथ गलत काम करता रहा और उसने शुरुआत में आवाज तक नहीं उठाई और जब उसने आवाज उठाई तो उसको अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। चुप रही क्योंकि उसको अपना घर चलाना थाए चुप रही क्योंकि उसको अपनी इज़्जत की चिंता थी कि कहीं इन सबसे उसकी बदनामी ना हो जायेए चुप रही क्योंकि उसे नौकरी से हाथ धो बैठने का डर था।
समाधान: छोड़ दें यह सोचना कि अगर मैंने बोल दिया तो लोग क्या सोचेंगे कहीं नौकरी ना चली जाएए कहीं बदनामी ना हो जाये। छोड़ दें यह सब सोचना और पहली बार हुई गलती और छेड़छाड़ पर आवाज उठाएं और बोलें निडर होकर कि आपके साथ जो हो रहा है वह गलत है। गलत हरकत के बारे में बतायें क्योंकि अभी नहीं तो कभी नहीं। बाद में यही समस्या आपके लिए किसी बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है। फिर यही सुझाव देना चाहेंगे कि अगर आपको पता है कि वह व्यक्ति आपके साथ दुबारा वही हरकत करेगा तो अपना रिकॉर्डर ऑन रखें और हो सके तो सबूत के तौर पर विडिओ अगर बन सकें तो वह भी बना लें। जैसा अभी इसमें उस पीडि़ता ने शेयर भी किया कि उसे अंत में अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा तो अगर आपके पास पक्के सबूत हों तो आपको नहीं उस इंसान को जाने की जरूरत पड़ेगी।
3. मजाक-मजाक में अपशब्द बोल जाना और उसके बाद इस बात का अफसोस तक नहीं होना कि जो उसने किया गलत किया और दूसरों को वही बात सुना सुना कर मजे लेना। आमतौर पर कई बार कार्यस्थलों में लोग मज़ाक मज़ाक में इतनी भद्दी बात तक बोल जाते हैं कि उनको खुद को ही नहीं पता होता की क्या बोल गए।
समाधान: अगर किसी भी लडक़ी और महिला के साथ मज़ाक में भी ऐसे कुछ शब्दों का प्रयोग हो रहा है तो उसे पहले एक दो चेतावनी देनी चाहिए और अगर तब भी वह व्यक्ति ना सुधरे तो उसको खुलकर अपने सीनियर के साथ इस बात को शेयर करना चाहिए ताकि वह इस बात का उस व्यक्ति को अहसास दिला सके कि जिन शब्दों का प्रयोग उसने किया है वह गलत है और आगे उन शब्दों का दुबारा प्रयोग ना करे जो किसे के चरित्र पर कटाक्ष करते हों। उसको इस बात का अहसास कराया जाना अनिवार्य है कि उसने जो बोला गलत है। इस बात का किसी को अधिकार नहीं है कि किसी के चरित्र पर कोई ऊँगली उठाये। हमारे देश में सबको अपने विचारों की अभिव्यक्त करने की आज़ादी है पर किसी को अपशब्द और किसी के चरित्र पर ऊँगली उठाने का अधिकार किसी को भी नहीं है।
उक्त उदाहरण समाज के लोगों की मानसिकता को दर्शाते हैं कि समाज में एक औरत और एक लडक़ी को लेकर क्या सोच है। लोग बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन उस समय उस लडक़ी पर क्या बीत रही होती है इस बात पर कोई ध्यान नहीं देता। क्यों लड़कियों को ही इस गन्दी मानसिकता का सामना करना पड़ता है..., क्यों लड़कियों को ही यह सब सहन करना पड़ता है? चूँकि वह एक लडक़ी है इसलिए यह सब सहन करती रहे? आमतौर पर यह भी देखा जाता है कि अधिकतर समस्या के वक्त खुद एक लडक़ी और एक औरत दूसरी औरत का साथ नहीं देती। आप खुद सोचिये कब तक आप दूसरों पर निर्भर रहेंगी। आप खुद में इतनी सक्षम हैं कि आपको किसी की जरूरत नहीं। अपने लिए अगर अभी नहीं कह पाईं तो कभी नहीं कह पाएंगी। एक कहावत भी है- तब पछतावे होत क्या जब चिडिय़ा चुग गई।

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