जन संदेश न्यूज नेटवर्क
कानपुर: पीएम नरेंद्र मोदी ने कानपुर आईआईटी के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों से कहा कि हमें कभी चुनौती से नहीं भागना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो लोग चुनौती से भागते हैं वो उनका शिकार बन जाते हैं। उन्होंने कहा, अपनी यात्रा में आपको सहूलियत के लिए शॉर्टकट भी बहुत लोग बताएंगे लेकिन मेरी सलाह यही होगी कि आप कंफर्ट मत चुनना, चुनौती जरूर चुनना। क्योंकि आप चाहें या न चाहें, जीवन में चुनौतियां आनी ही हैं। जो लोग उनसे भागते हैं वो उनका शिकार बन जाते हैं। पीएम ने कहा कि आप अपनी मानवीय संवोदनाओं को और जानने की ललक को कभी मरने मत देना। लोगों से जुडऩे की अपनी इच्छा को दबने नहीं देना। जीने की जिजीविषा का नाम ही जीवन है और इसे पूरे आनंद एवं उल्लास से जीना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा आत्मनिर्भर बनने के लिए अधीर बनें। मैं भी अधीर हूं। वर्ष 2047 में भारत कैसा होगा, यह आपको ही तय करना है। आपको ही देश की दिशा व गति तय करनी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 साल की उम्र में अपने पैरों पर खड़े हो जाना चाहिए। मगर देश आजादी के बाद 25 साल की उम्र में पैरों पर खड़ा नहीं हो पाया। अब काफी समय गुजर गया है और दो पीढिय़ां बीत गई हैं। इसलिए एक पल भी बर्बाद नहीं करना है। भविष्य में टेक्नोलॉजी के बिना जीवन अधूरा होगा। ये समय जीवन व टेक्नोलॉजी में प्रतिस्पर्धा का है। इसमें आपको आगे निकलना है। मुझे विश्वास है कि आप इसे पूरा करोगे।
उन्होंने कहा कि कौन भारतीय नहीं चाहेगा कि भारत की कंपनियां ग्लोबल बनें, भारत के उत्पाद ग्लोबल बनें जो आईआईटी को जानता है। यहां के टैलेंट को जानता है, यहां के प्रोफेसर्स की मेहनत को जानता हैए वो ये विश्वास करता है ये आईआईटी के नौजवान जरूर करेंगे। आज भारत दुनिया का दूसरा स्टार्ट हब बनकर उभरा है। तीसरा सबसे बड़ा यूनीकॉर्न देश बन गया है। उन्होंने कहा कि मेरी बातों में आपको अधीरता नजर आ रही होगी लेकिन मैं चाहता हूं कि आप भी इसी तरह आत्मनिर्भर भारत के लिए अधीर बनें। यदि हम आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तो हमारा देश अपने लक्ष्य कैसे पूरे करेगा, अपनी डेस्टिनी तक कैसे पहुंचेगा। जब देश की आजादी को 25 साल हुए, तब तक हमें भी अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए बहुत कुछ कर लेना चाहिए था।
आईआईटी के 54वें दीक्षांत समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये दौर, ये 21वीं सदी, पूरी तरह प्रौद्योगिकी संचालित है। इस दशक में भी तकनीकी अलग-अलग क्षेत्रों में अपना दबदबा और बढ़ाने वाली है। अब बिना तकनीक के जीवन अब एक तरह से अधूरा ही होगा।
ये जीवन और तकनीक की स्पर्धा का युग है और मुझे विश्वास है कि इसमें आप जरूर आगे निकलेंगे। जब आपने आईआईटी कानपुर में प्रवेश लिया था और अब जब आप यहां से निकल रहे हैं, तब और अब में आप अपने में बहुत बड़ा परिवर्तन महसूस कर रहे होंगे।
युवाओं से बोले मोदीए यह आपके जीवन का भी अमृतकाल है
कानपुर के इतिहास पर नजर डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्ती चौरा घाट से लेकर मदारी पासी तकए नाना साहब से लेकर बटुकेश्वर दत्त तक। जब हम इस शहर की सैर करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हम स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों के गौरव कीए उस गौरवशाली अतीत की सैर कर रहे हैं। 1930 के उस दौर में जो 20.25 साल के नौजवान थेए 1947 तक उनकी यात्रा और 1947 में आजादी की सिद्धिए उनके जीवन का गोल्डन फेस थी। आज आप भी एक तरह से उस जैसे ही गोल्डन एरा में कदम रख रहे हैं। जैसे ये राष्ट्र के जीवन का अमृतकाल हैए वैसे ही ये आपके जीवन का भी अमृतकाल है।
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