हरियाणवी मखौल
टुग्गी राम उसका साब तै बोल्या- साब जी, मैं कल तै सांझ नै सात बजे घर चल्या जाया करूंगा। साब बोल्या- क्यूं, के ओया। टुग्गी बोल्या- जी थारी नौकरी तै मेरा घर कोनी चालदा, रात नै रिक्शा चलाया करूंगा। साब घणा भावुक सा ओकै बोल्या- ठीक सै टुग्गी, अरजे कदे भूख लागण लाग ज्या, मेरै धोरै आ जाया कर, रात नै मैं भी दाल-चौल की रेहड़ी लाया करूं।
राणी की तरियां राखूंगा...
फत्तू अर उसकी घरआली की तकड़ी लड़ाई ओगी। तो वा बोल्ली- तन्नै ब्याह तै पैल्यां क्यूं नी कया के तेरी राणी नाम की एक ओर लुगाई सै। तो फत्तू पड़दाए बोल्या- क्यूं, बताया तो था के तन्नै राणी की तरियां राखूंगा।
एक चुड़ैल की आत्मा...
संता एक तांत्रिक धोरै चल्या गया तो तांत्रिक बोल्या- बच्चा, मन्नै तेरै ऊपर एक चुड़ैल की आत्मा दिक्खै सै। संता पड़दाए बोल्या- बाबा मैं तेरै खींच कै रैपटा मार दयूंगा, जिसन तों चुड़ैल कवै सै वा मेरी महिला मित्र सै।
धरती घूमदी ओई नजर आवैगी...
एक भूगोल पढाण आली घणी पतली सी मास्टरणी की बदली शहर तै गाम आला स्कूल मै होगी। तो वा भूगोल पढ़ांदे ओए बालकां तै एक सवाल पूच्छण लाग गी के बालकों मन्नै न्यूं बताओ धरती घूमदी ओई क्यूं नी नजर आंदी। तो रामफल पड़दाए बोल्या-मैडम जी कुछ खा-पी लिया करो नहीं तो धरती घूमदी ओई भी नजर आण लाग ज्यागी।
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