समीक्षा — यह काली बंगा है

नाम पुस्तकः यह काली बंगा है
लेखकः गोविंद शर्मा
प्रकाशकः नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली
वर्ष:  2022
मूल्य: 65/-

दिन-ब-दिन बच्चों के साहित्य में विविधताओं के समावेश हो रहा है। कहानी कविता नाटक से आगे आत्मकथा, यात्रा विवरण, जानकारी आदि शामिल हो रहे हैं। साहित्य में पुरातत्व को गूढ एवं गंभीर ज्ञान की श्रेणी में माना जाता रहा है। किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कोई लेखक एक दिन इसविषय पर बालपाठकों के लिये साहित्य की रचना करेगा। संभवतः पहली बार बालपाठकांे के लिये पुरातत्व अर्थात् पांच हजार वर्ष पहले की सभ्यता की खोज पर लिखने के लिये श्री गोविंद शर्मा ने सोची और नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया (देश के सबसे बड़े प्रकाशक) ने छापने की सोची। ट्रस्ट के संपादक श्री पंकज चतुर्वेदी के संपादन में आई है नई बाल पुस्तक ‘‘यह काली बंगा’’ है।

गोविंद शर्मा वरिष्ठ बालसाहित्यकार हैं। अब तक उनकी बालसाहित्य की 40 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हे। उन्हें भारत सरकार के प्रकाशन विभाग, राजस्थान साहित्य अकादमी और केन्द्रीय साहित्य अकादमी के सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

राजस्थान के हनुमानगढ जिला में स्थित है एक गांव कालीबंगा। पुरातत्व शास्त्रियों ने वर्षों तक इस गांव के पास के टीले की खुदाई की तब वहां मिले दो प्राचीन सभ्यताओं के अवशेष। एक सभ्यता लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी तो दूसरी लगभग तीन हजार वर्ष पुरानी। वहां खुदाई में बर्तन, कृषि यंत्र, गली, नाली और बड़े मृदा भांड मिले। उनका वर्षों तक अध्ययन हुआ। तब आई सामने दो सभ्यताओं की कहानी। 

इस पुस्तक में सरल भाषा में पूरी कहानी है इन सभ्यताओं की। खोज करने वाले पुरातत्व शास्त्रियों का विवरण भी हैं। वहां मिले अवशेषों के चित्र एवं उनका विवरण भी है।

पुस्तक में यत्र तत्र अनेक रेखाचित्र हैं। इन्हें बनाया अबीरा ने वंद्योपाध्यय ने।

नेशनल बुक ट्रस्ट ने बड़े ही सुंदर ढंग से पुस्तक को प्रकाशित किया है। मूल्य भी सामान्य है। मुझे पूरा यकीन है कि यह पुस्तक बालपाठकों में पुरातत्व एवं प्राचीन सभ्यताओं में रूचि जाग्रत करेगी। निसंदेह बालसाहित्य को नये नये विषयों से समृद्ध करना आवश्यक भी हैं इस अनोखे एवं उपयोगी रचनाकर्म के लिये गोविंद शर्मा जी बधाई।

लखवीर शर्मा, चौटाला (हरियाणा)

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