चंचल मन की चाहत होती
मंजिल पहुँच सफल हो जाना।
ऊँची-सी पहचान बनाकर
सबकी आँखों में बस जाना।
एक मंजिल पाने की खातिर
साथी खुद को भूल न जाना।
आसपास के सभी खास हैं
सबसे मिलना और बतियाना।
अनजानी-सी एक खुशी पर
बाकी खुशियाँ मत वारो।
हँसी-खुशी रखे रोमांचित
गुमशुम जीना क्या यारो !
उमंग-तरंग साहस-सम्बल
मन में सच्ची लगन लगी।
नित्य कर्मरत रहने वालों
मंजिल पाओ खुशी-खुशी।।
नरेन्द्र सिंह नीहार
नई दिल्ली

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