जन संदेश न्यूज नेटवर्क
भिवानी: सरकार से नौकरियों में खेल कोटा खत्म किए जाने पर खफा खिलाड़ी, कोच व विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व ओलंपिक विजेता बॉक्सर बिजेंद्र ने किया। उन्होंने कहा कि आज पूरे भारत में हर गेम में हरियाणा के खिलाड़ी अव्वल रहते हैं। अगर कोटा खत्म होता है तो खिलाडिय़ों का मनोबल डाउन होगा। उन्होंने कहा कि यदि खेल कोटा बहाल नहीं किया गया तो प्रदेशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे, राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
द्रोणाचार्य अवॉर्डी जगदीश सिंह व कोच संजय श्योराण के अनुसार, अगर सरकार नौकरियों में कोटा बहाल नहीं करती है तो खिलाडिय़ों में निराशा की भावना फैल जाएगी। युवा कल्याण संगठन के संरक्षक कमल सिंह प्रधान के अनुसार, वे कंधे से कंधा मिलाकर खिलाडिय़ों का साथ देंगे और तब तक चुप नहीं बैठेंगे, जब तक सरकार कोटा बहाल नहीं कर देती। आज का प्रदर्शन संयुक्त खेल मोर्चा और विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों ने मिलकर किया। उन्होंने बाजार में होते हुए लघु सचिवालय पहुंचकर सीएम के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन में संयुक्त खेल मोर्चा के प्रधान विनोद पहलवान, पदम सिंह राठी, राजबीर फरटिया, फू्रटी कोच, सुखबीर कोच, कैलाश गिल कोच, भूपेंद्र कोच, जगदीश एथलीट कोच, बिरेंद्र किरोड़ी, सुरेंद्र पहलवान, नीतू बॉक्सर, सुंदर पहलवान, आशीष बेनिवाल, किसान नेता कामरेड ओमप्रकाश ओर प्रिया ग्रेवाल उपस्थित थे।
खेल कोटा बढ़ाने की मांग
युवा कल्याण संगठन के संरक्षक के अनुसार, पिछले दिनों साई हॉस्टल भिवानी की सीट कम कर दी थी और खिलाडिय़ों ने संघर्ष किया तो सीट दोबारा बहाल की गयीं। अब खिलाडिय़ों का संघर्ष जब खत्म होगा जब तक कोटा 3 से छह प्रतिशत तक न बढ़ा दिया जाये।
खिलाडिय़ों के साथ खिलवाड़
रोहतक: प्रदेश की गठबंधन सरकार नौकरियों में खिलाडिय़ों का कोटा खत्म कर खिलाडिय़ों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। सिवाच खाप प्रदेश सरकार के इस फैसले का विरोध करती है और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इस फैसले को वापस लेने की मांग करती है। सिवाच खाप पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंचल सिवाच, महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष देविका सिवाच, राष्ट्रीय प्रवक्ता कृष्ण बडाली, संगठन मंत्री संदीप सिवाच ढाया, महिला प्रदेश अध्यक्ष सुमनलता, महासचिव सुनीता, प्रदेश उपाध्यक्ष हुक्म सिंह ने कहा कि हरियाणा न केवल खेतीबाड़ी में आगे है बल्कि खेलों में देश को मेडल दिलाने में भी हरियाणा का कोई मुकाबला नहीं।
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