जन संदेश न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली: सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उन्हें ओडिशा के सभी दलों के सांसदों और विधायकों का समर्थन मिलने की उम्मीद है क्योंकि वह उस प्रदेश की बेटी हैं। जनजातीय नेता से राज्यपाल तक का सफर तय करने वाली मुर्मू ने कहा कि उन्हें टीवी के जरिये जानकारी मिली कि उन्हें राजग की ओर से देश के सर्वोच्च पद का प्रत्याशी घोषित किया गया है। मुर्मू ने रायरंगपुर में अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा- मैं आश्चर्यचकित और खुश हूं।
यशवंत सिन्हा झारखंड से सांसद रह चुके हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी रह चुके हैं। 84 साल के हो चुके सिन्हा को विपक्षी खेमे में स्थान मिला और उसने राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें अपना संयुक्त उम्मीदवार बनाया है। सिन्हा ने 1984 में प्रशासनिक सेवा छोड़ दी और जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने 1998 में हजारीबाग से लोस चुनाव जीता, सरकार में 2002 तक वित्त मंत्री रहे और बाद में विदेश मंत्री बने।
यशवंत सिन्हा अपने करीब चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में समाजवादी नेता चंद्रशेखर से लेकर भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी तक के करीबी सहयोगी रहे। भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी सिन्हा पार्टी एवं सरकार में कई प्रमुख पदों पर रहे लेकिन भाजपा में नए नेतृत्व के उभरने के साथ ही पिछले दशक में उनके सितारे धुंधले पडऩे लगे।
मयूरभंज जिले से आने वाली एक आदिवासी महिला के रूप में मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इस पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजग सरकार ने आदिवासी महिला का चयन कर के भाजपा के नारे ‘सबका साथ सबका विश्वास’ को सिद्ध कर दिया है। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें बीजू जनता दल (बीजद) का समर्थन मिलेगा, मुर्मू ने कहा, मुझे आशा है कि मुझे ओडिशा के सभी विधायकों और सांसदों का समर्थन प्राप्त होगा। राष्ट्रपति चुनाव के लिए इलेक्टोरल कॉलेज में बीजद के पास 2.8 प्रतिशत से ज्यादा मत हैं। मैं इस प्रदेश की बेटी हूं। मुझे एक ओडिय़ा होने के नाते सबसे यह अनुरोध करने का अधिकार है कि मेरा समर्थन करें। संथाल समुदाय में जन्मी मुर्मू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत के सदस्य के रूप में की थी, आगे बढ़ते-बढ़ते 2000 में बीजद-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री बनीं और 2015 में झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं।
रायरंगपुर सीट से दो बार विधायक रह चुकीं मुर्मू 2009 में उस वक्त भी अपनी सीट से जीती थीं जब बीजद ने चुनाव से कुछ ही सप्ताह पहले भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया था। इस चुनाव में बीजद को भारी जीत मिली थी। मुर्मू ने कहा कि मुझे इस अवसर की आशा नहीं थी। मैं पड़ोसी राज्य झारखंड की राज्यपाल बनने के बाद छह साल से भी ज्यादा वक्त से राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं ले रही थी। आशा करती हूं सभी मेरा साथ देंगे। द्रौपदी की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद उनके पैतृक मयूरभंज जिले में खुशी का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। वहीं, बारगढ़ से भाजपा सांसद सुरेश पुजारी ने कहा कि आदिवासी महिला को राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाने के पार्टी के फैसले से हम सभी बहुत खुश हैं।
ऐसी पहली बार हुआ है कि इस धरती की बेटी को इस पद के चुना जाएगा। आदिवासी मामलों के केन्द्रीय मंत्री बिशीस्वर तुदु ने कहा कि मैं खास तौर से खुश हूं क्योंकि मुर्मू मेरे लोकसभा क्षेत्र और मेरे आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। संकेत हैं कि मुर्मू के नाम की घोषणा से पहले भाजपा ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से चर्चा की है।
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